भदोही। अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में हर साल दाखिले के नाम पर वसूली और बेहिसाब फीस बढ़ोत्तरी के बावत प्रदेश सरकार के नए दिशा-निर्देश से स्कूल प्रबंधन में भय जरूर पैदा हुआ है लेकिन मनमानी अभी भी जारी है। फीस, किताब-कापियां और युनिफार्म के नाम पर जमकर वसूली कर रहे हैं। हालत ये हैं कि 20 रुपये की कापी 50 रुपये में खरीदने के लिए अभिभावक मजबूर हैं।
नया सत्र शुरू होते ही स्कूलों में कापी-किताब और युनिफार्म की दुकानें खुल गई हैं। अभिभावकों ने शासन के नए निर्देशों पर राहत की सांस जरूर ली है लेकिन दूसरे मदों में उन्हें हजारों रुपये की चपत लग रही है। नगर में सीबीएसई से संबद्ध पांच और आईसीएसई संबद्ध एक विद्यालय है। इसके अलावा कक्षा आठ तक शिक्षा देने वाले बहुत से विद्यालय हैं, जिन्हें मानकों और सरकार के दिशा निर्देशों से कोई सरोकार नहीं है। ऐसे विद्यालयों में अभिभावकों को पुस्तकें और युनिफार्म स्कूल से ही खरीदने को मजबूर किया जाता है। बाजार सलाबत खां के पप्पी अंसारी ने बताया कि उनकी बेटी का दाखिला एलकेजी में हुआ है। उसके बाद उसकी पुस्तकें और कापियां 2200 रुपये में स्कूल से लेनी पड़ीं। बताया जो कापी बाजार में 20 रुपये में मिल रही है, वही कापी 50 रुपये में खरीदनी पड़ती है। मशाल रोड के मसूद आलम ने कहा कि सरकार ने सही कदम उठाया है। भले इसका लाभ मिलने में थोड़ा समय लगे। कहा विद्यालयों के खिलाफ अभिभावकों को अपील करने का अधिकार देना भी अच्छा कदम है।
उधर, विद्यालयों में हर साल फीस में दस प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी होती है, जो इस वर्ष भी की गई है। हालांकि शासन के निर्देश के बाद इसे घटाकर सात से आठ फीसदी तक करने की कवायद स्कूल संचालकों ने शुरू कर दी है। वुडवर्ड पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल शालिनी मेहरा ने बताया कि सीबीएसई का मानक प्रत्येक वर्ष10 प्रतिशत फीस वृद्धि का है लेकिन प्रदेश सरकार के निर्देश के बाद हम उस पर अमल कर रहे हैं।