वाराणसी। काशी की अनूठी परंपराओं, घाट से गलियों तक विविधताओं से भरे सांस्कृतिक जीवन की दुनिया दीवानी है। मंगलवार को वरुणा नदी के तट पर चौकाघाट पर दारू से हजारों लोगों ने अपनी कुल देवी को अर्घ्य दिया। खुलेआम जाम से भरे प्याले आस्थावानों ने छलकाएा। डफालियों ने डफ बजाया और कालिका सहजा देवी की याद में हजारों लोग झूम उठे। मौका था वरुणा पियाला मेला का।
कालिका सहजा देवी की याद में वरुणा नदी के तट पर अपने तरह का अनूठा सांस्कृतिक मेला मंगलवार को यादगार बन गया। पियाला मेला में छोटी बिरादरी के लोगों का समागम हुआ। चौकाघाट पर करीब एक किमी के दायरे में धोबी, बिंद के अलावा इनसे जुड़ी अन्य बिरादरी के लोग पौ फटने से पहले ही वरुणा नदी के तट पर दारू लेकर पहुंचने लगे। इस मेले में गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल भी देखते बनी। वेदियों पर दारू से भरे प्याले सजाए गए। शराब से प्याले भरने के बाद मां कालिका सहजा देवी की पूजा शुरू हुई। शंख की जगह डफालियों ने डफ बजाएंगे। इस मेले में सहजा माता की पूजा के लिए डफ बजाने वाले डफाली मुसलमान होते हैं और पूजा करने वाले हिंदू। जिला धोबी घाट बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष नंदू कन्नौजिया के अनुसार कालिका सहजा माता उनके समाज की कुलदेवी हैं। वर्ष भर मंगल रहे, परिवार से लेकर समाज तक उन्नति के पथ पर बढ़े, बच्चों, बड़ों को बीमारियां, कष्ट न घेरने पाएं, इस कामना से कलिका सहजा माता की याद में प्याले भरे जाते हैं।