वाराणसी। ठुमरी साम्राज्ञी पद्मविभूषण गिरिजा देवी को उनकी काशी ने 13 दिन में ही भुला दिया। उनके त्रयोदशाह पर मंगलवार को नमन करने के लिए उनके घर पर शाम गिनती के लोग ही दिखे। संगीत प्रेमियों, शुभेच्छुओं ने उनके चित्र पर लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित की। संगीत जगत से जुड़े लोगों का कहना था कि गायन की बनारस घराने की शैली में उनके सुर हमेशा अमर रहेंगे। उनके जैसा न कोई था न अब कोई होगा।
हालांकि देव दीपावली पर ठुमरी साम्राज्ञी को पूरी शिद्दत से याद किया गया। तुलसी घाट पर उनकी 51 फुट की प्रतिमा के समक्ष उन्हें स्वरांजलि भी अर्पित की गई लेकिन मंगलवार को त्रयोदशाह पर जैसी की उम्मीद की जा रही थी कि संगीत के बड़े दिग्गज उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने जुटेंगे, ऐसा न हुआ। काशी के ही कई नामचीन कलाकार तक अपनी उपस्थिति नहीं दर्ज करा सके।
गिरिजा देवी के त्रयोदशाह पर संजय गांधी नगर कॉलोनी में उनके घर पर दोपहर में ब्राह्मण भोज हुआ। शाम को उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने के लिए उनकी कुछ शिष्याओं के अलावा आला अफसर पहुंचे थे। जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने उनके घर पहुंच कर श्रद्धांजलि अर्पित की। उनका कहना था कि अप्पा जी जैसी संगीत की गुणी गुरु का होना काशी के लिए ही नहीं, देश के लिए गौरव की बात थी। शाम को एसएसपी रामकृष्ण भारद्वाज भी पहुंचे। उनकी शिष्याओं में पद्मश्री मालिनी अवस्थी, सुनंदा शर्मा, डॉ. रीता देव के अलावा राहुल-रोहित मिश्र ने पुष्प अर्पित कर अप्पा जी को नमन किया। इस दौरान शिष्याएं उनकी पुत्री सुधा दत्ता से लिपट कर फफकती रहीं। संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र, बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय के प्रो. वीरेंद्र नाथ मिश्र ने घर पहुंचकर अप्पा जी को श्रद्धा सुमन अर्पित किया। लेकिन बनारस घराने में जहां गायन विधा में पांच सौ से अधिक नए -पुराने कलाकार होंगे, वहीं शाम को उनके घर पर 50 से अधिक लोग नहीं थे।