सेवापुरी। शहर की तरह गांवों में भी शुरू की गई एलईडी स्ट्रीट लाइट योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने लगी है। कमीशन के चक्कर में लोकल और घटिया किस्म की स्ट्रीट लाइटें महंगे दामों पर लगाई जा रही हैं। यही वजह है कि भरहुआ गांव में 10 दिन पहले लगाई गईं 35 लाइटों में 22 खराब हो गई हैं। कमीशन के इस खेल में ग्राम प्रधान से लेकर ब्लॉक और जिले के अधिकारी शामिल हैं।
केंद्र सरकार का निर्देश है कि सरकारी योजनाओं के तहत आईएसआई मार्का के ही बल्व आदि विद्युत उपकरण प्रशिक्षित कर्मचारियों के जरिये लगवाए जाएं। साथ ही उपकरण की सप्लाई ऐसी फर्म से ली जाए, जो वाणिज्य कर और आय कर विभाग में पंजीकृत हो लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। गांव में लगाई जा रही स्ट्रीट लाइटों पर आईएसआई मार्का नहीं है। 40 वाट की एलईडी लाइट के कवर पर सिर्फ जी लाइट, एसी लाइट 40 वाट, बोरीवली मुंबई अंकित है। यही नहीं, सारे उपकरणों की सप्लाई पंजीकृत फर्म की बजाय लोकल स्तर के ठेकेदारों के जरिये हो रही है। इतना ही नहीं, किसी गांव में 3500 रुपये तो कहीं चार या पांच हजार रुपये प्रति लाइट की दर से भुगतान किया जा रहा है।
ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी ने कार्ययोजना तैयार कर बीडीओ से स्वीकृति ले ली है। लाइट लगने का काम पूरा होने पर सत्यापन के बाद ही भुगतान का प्रावधान है लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। काम के सत्यापन के बगैर भुगतान किया जा रहा है। खरगूपुर की ग्राम प्रधान विनीता पटेल ने बताया कि ठेकेदार ने गांव में 35 स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए मेरे घर पर पहुंचा दिया है। भरहुआ की प्रधान श्वेता मौर्या ने बताया कि ठेकेदार ने 35 स्ट्रीट लाइट दस दिन पहले लगवाई थी, जिनमें 22 लाइट खराब हो गई हैं। शिकायत के बाद भी ठेकेदार ने लाइट नहीं बदली। दोनों ने बताया कि इसका भुगतान 14वें वित्त आयोग के खाते से 3500 रुपये प्रति लाइट की दर से करना है। बडौरा के सेक्रेटरी ने बताया कि गांव में 50 लाइट लगाई गई हैं। सप्लायर को प्रति लाइट 4000 रुपये की दर से भुगतान किया गया है। जानकारों का कहना है बाजार में इस लाइट की कीमत 500 से 1000 रुपये है लेकिन गांवों में इसे ऊंची दरों पर लगाया जा रहा है।