वाराणसी। कछुआ सेंक्चुअरी में क्रूज और बड़े विमान चलाने की अनुमति भले मिल गई हो लेकिन अभी निर्धारित शर्तों पर अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। इस वजह से फिलहाल कछुआ सेंक्चुअरी में जहाज या क्रूज चलाने में दिक्कत आ सकती है। इसे लेकर सोमवार को आईडब्ल्यूएआई की बैठक वन विभाग से होगी।
अगस्त के पहले सप्ताह में राजमहल आएगा। बड़े क्रूज और मालवाहक जहाज का भी आना शुरू हो जाएगा। कछुआ सेंक्चुअरी में जहाज और क्रूज के प्रवेश पर प्रतिबंध है। कछुआ सेंक्चुअरी में प्रवेश के लिए वन विभाग से अनुमति लेनी पड़ती है। कछुआ सेंक्चुअरी में निर्बाध प्रवेश के लिए प्रयास चल रहा था। बाद में नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड ने कुछ शर्तों के साथ प्रवेश की अनुमति दी लेकिन इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका है। शर्त यह है कि जहाज पांच किमी प्रति घंटा या इससे कम रफ्तार में चलेंगे। गंदगी नही करेंगे। प्रोपेलर में जाली लगाएंगे। निर्धारित मार्ग से चलेंगे। परियोजना की शुल्क का मोटा हिस्सा वन्य जीवों की सुरक्षा और उन पर रिसर्च के लिए ट्रस्ट पर खर्च करेंगे।
आईडब्ल्यूआई सूत्रों की मानें तो अभी ट्रस्ट वाली शर्त को लेकर संशय है। इससे जहाज के रास्ते में रोड़ा अटका हुआ है। राजमहल के आने से पहले वह मौजूदा किसी समस्या को दूर करना चाहते हैं। इसी को लेकर सोमवार को लखनऊ में एक बैठक होगी। संभावना है कि इसमें सभी समस्याओं को दूर कर लिया जाएगा। आईडब्ल्यूएआई के निदेशक पटना एके मिश्रा ने बताया कि सोमवार को बैठक में जहाज को कछुआ सेंक्चुअरी से लेकर जाने पर चर्चा होगी। बता दें कि राजमहल काशी आने के बाद रामनगर किले तक जाता है। इसी बीच में कछुआ सेंक्चुअरी पड़ती है, जिसमें प्रवेश को लेकर पिछली बार काफी समस्या आई थी।