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गंगा किनारे कैमरे में कैद हुए छऊ नृत्य के भाव

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वाराणसी। भावपूर्ण थिरकन के साथ रागों-बंदिशों से शाम सजी तो रिमझिम फुहारों के बीच सुहावनी सुबह भी यादगार बन गई। मौका था ‘द स्टोरी टेलर ऑफ बनारस’ शीर्षक से तैयार हो रहे नए ब्लाग के लिए गंगा तट पर फोटो वाक का। सुबह जहां छऊ नृत्य की विभिन्न मुद्राओं, भावों पर आधारित तसवीरें कैमरे में कैद की गईं, वहीं रात को बीएचयू के केएन उडप्पा सभगार में भारतीय शास्त्रीय संगीत और आभासी संसार विषयक परिचर्चा के बाद गायन और नृत्य की प्रस्तुतियां मन मोह गईं।
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बीएचयू की छात्रा स्वस्ति तिवारी की ओर से आयोजित फोटो वाक के दूसरे दिन ललिता घाट स्थित नेपाली मंदिर के ठीक सामने छऊ नृत्य की मुद्राओं पर तसवीरें क्लिक की गईं। छायाकारों ने अपनी-अपनी कल्पनाशीलता के आधार पर नृत्य की लय और भावों को बनारस के घाटों, सीढ़ियों और मढ़ियों को केंद्र में रखकर कैमरे में कैद किया। शाम को कथक नृत्य के साथ छऊ की प्रस्तुति पर संगीत प्रेमी मुग्ध हुए। तो दादरा, ठुमरी की प्रस्तुतियां भी खूब सराही गईं। रूपवाणी के निदेशक ब्योमेश शुक्ल ने आभार जताया। कलाकारों का स्वागत किया धीरेंद्र मोहन ने।
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