वाराणसी। 13 नालों को रोकने के लिए वरुणा के दोनों किनारों पर 10-10 किमी की इंटरसेप्टर पाइप लाइन बिछाई जाएगी, जिसे लोहता में बनने वाली एसटीपी से जोड़ा जाएगा। पूर्व में वरुणा कॉरिडोर के दौरान जो पाइपलाइन बिछाई गई थी, वह कई जगहों से टूट-फूट गई है। इंटरसेप्टर लाइन को एसटीपी से जोड़ा जाएगा ताकि एक बूंद भी गंदा पानी वरुणा में न गिरे। नदी में गंदा पानी गिरने से रोकने के लिए ड्रेनेज बाईपास बनाना होगा। गंदा पानी बाईपास में जाएगा, जहां इसे ट्रीट करके दोबारा खेतों और अन्य कामों में भेजा जाएगा।
पानी पूरी तरह से साफ हो जाने के बाद इसे पर्यटन के लिहाज से विकसित किया जाएगा, ताकि पर्यटकों की संख्या बढ़े। पहले चरण में वरुणा की गंदगी को साफ करना है, इसके बाद सुंदरीकरण का कार्य होगा। लोहता में 274.31 करोड़ रुपये की लागत से 60 एमएलडी का एसटीपी का निर्माण किया जाएगा। नालों को रोकने से मलजल सीधे वरुणा नदी में नहीं जाएगा। वरुणा आदिकेशव घाट पर गंगा में मिलती है। ऐसे में एसटीपी बनने से गंगा और वरुणा दोनों नदियों को प्रदूषण मुक्त किया जा सकेगा।
परिस्थितिकी तंत्र को फिर से जीवित करने की तैयारी
जल निगम की गंगा प्रदूषण इकाई ने करीब डेढ़ साल पहले सर्वे कराया था। सर्वे के बाद जल निगम ने वर्ष 2037 तक शहर की आबादी को ध्यान में रखते हुए 1780.86 करोड़ रुपये की लागत से चार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाने का प्रस्ताव केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय को भेजा था। इसके तहत लोहता में एसटीपी बनेगा। इस क्षेत्र के दुर्गा नाला से वरुणा नदी में गिर रहे अशोधित सीवेज को रोकने के लिए नमामि गंगे के तहत वरुणा नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को फिर से जीवित करना है।
वर्जन
वरुणा किनारे इंटरसेप्टर लाइन बिछेगी, जिसे लोहता एसटीपी से जोड़ा जाएगा। इससे नालों से गिरने वाले सीवर को रोका जाएगा। इसके लिए पूरी कार्ययोजना बनाई गई है। टेंडर प्रक्रिया अपनाई जा रही है। - केके सिंह, अधिशासी अभियंता, जल निगम