इस योजना के तहत बाबा के धाम से लेकर विशालाक्षी मंदिर तक गली को चौड़ा किया जाएगा। इससे विशालाक्षी मंदिर से बाबा के धाम में आने का मार्ग सुगम हो जाएगा और आसानी से श्रद्धालु मां के दरबार तक पहुंच सकेंगे। विस्तारीकरण के लिए सर्वे का काम 2024 में ही पूरा हो गया था। सर्वे की रिपोर्ट आने के बाद मंदिर न्यास ने भवनों की खरीद-फरोख्त के लिए अब शासन को प्रस्ताव भी भेज दिया है।
विस्तारीकरण योजना पर मंदिर के महंत ने भी अपनी स्वीकृति दे दी है। पिछले दिनों काशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद की बैठक में भवनों को क्रय करने पर मुहर लग चुकी है। एसडीएम शंभूशरण ने बताया कि परिषद की बैठक में भवनों को क्रय करने पर सहमति बन चुकी है। इसका प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है और वहां से अनुमति मिलते ही इस दिशा में कार्य शुरू हो जाएगा।
18 से ज्यादा हैं पौराणिक देवी-देवता
काशी विश्वनाथ धाम से माता विशालाक्षी मंदिर और धर्मकूप और सरस्वती फाटक तक 18 से ज्यादा पौराणिक देवी देवता और तीर्थ हैं। इसमें भगवान ज्ञानेश्वर जी, विष्णु मूर्ति एवं तीर्थ कूप, भगवान विश्वनाथ के पांच मुख में से एक वैराग्येश्वर जी, विशालाक्षी शक्तिपीठ, विशालाक्षेश्वर, अन्य छोटे देव विग्रह एवं विशालतीर्थ, माता विश्वभुजा गौरी एवं विश्वतीर्थ, विश्वनाथ, दिवोदासेश्वर जी, आशा विनायक जी, रघुनाथेश्वर जी, गणेश्वर जी, कांचन शाख महावट वृक्ष, धर्मकूप तीर्थ, धर्मेश्वर, मदालसेश्वर, मोक्षेश्वर एवं मुक्तितीर्थ हैं।
नवरात्र के बाद होगा मां विशालाक्षी मंदिर का सुंदरीकरण
काशी विश्वनाथ धाम से मां विशालाक्षी के मंदिर तक कॉरिडोर बनने से पहले मंदिर के सुंदरीकरण का कार्य होगा। नवरात्र के बाद मंदिर में सुंदरीकरण का कार्य शुरू हो जाएगा। मां विशालाक्षी मंदिर के सुंदरीकरण का कार्य नवंबर माह तक पूर्ण हो जाएगा। मंदिर के महंत राजनाथ तिवारी ने बताया कि मंदिर के सुंदरीकरण की तैयारियां शुरू हो गई हैं और नवंबर तक यह पूर्ण हो जाएगा।