सारनाथ। चैती उत्सव में बेला, गुलाब की पंखुड़ियों के बीच सुर-संगीत की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। रविवार की शाम सारनाथ स्थित विरासत हवेली में आयोजित इस रंगारंग कार्यक्रम में हर किसी पर चैत की रूमानियत खूब बरसी।
कार्यक्रम की शुरूआत पं. नरेंद्र मिश्रा व अमरेंद्र मिश्रा की युगलबंदी से हुई। उन्होंने राग चैती से शुरूआत की। राग हंसध्वनि में पूर्वी चैती ने हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया। तबले पर आदित्य मिश्रा ने संगत की। इसके बाद बनारस घराने की सुप्रसिद्ध गायिका पीयू मुखर्जी चैतमास बोले ले कोयलिया... से शुरूआत की। इसके उपरांत राग बसंत में माही रे मैं तो पिया संग होली खेली हूं होरी... पेश की। गायन की शृंखला को आगे बढ़ाते हुए तुम तो करत बरजोरी रे लैला तुमसे खेली होरी...प्रस्तुत किया। लागे तोरे नैनवा की बाण रे सांवरिया, श्याम सुंदर की प्यारी-प्यारी सुरतिया मन हर लीनो मेरा रे...सुनाया। इनके साथ हारमोनियम पर पं. धर्मनाथ मिश्रा, तबले नंदकिशोर मिश्र ने संगत की। इसके बाद सितार वादक अमरेंद्र मिश्र, बांसुरी पर सुधीर गौतम और तबले पर कुषाल कृृष्ण ने होरी की धुन सुनाई। संगीत महफिल के दौरान चैती गुलाब एवं बेला की पंखुड़ियों की बौछार होती रही। इस दौरान लोगों ने ठंडई, बनारसी पान, कचौड़ी, जलेबी का लुत्फ उठाया। इससे पूर्व मुख्य अतिथि गोपाल मंदिर के प्रियेंदु बाबा साहब ने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अतिथियों का स्वागत राजेश जैन ने किया। मौके पर पद्मश्री डॉ. रजनीकांत व डॉ. राजेश्वर आचार्य को सम्मानित किया गया। प्रभुदास राज, राजेश अग्रवाल, रत्नेश जैन व अशोक आदि मौजूद रहे।