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मृत्यु और जन्म दर का अनुपात सही करने की जरूरत

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वाराणसी। बीएचयू के सामुदायिक चिकित्सा विभाग की ओर से आयोजित कार्यशाला में मंगलवार को जन्म, मृत्यु पंजीकरण पर चर्चा की गई। बतौर मुख्य अतिथि आईएमएस के पूर्व डायरेक्टर और बीएचयू के रेक्टर प्रो. वीके शुक्ल ने कहा कि मृत्यु और जन्म दर के अनुपात को सही करने की जरूरत है। इससे देश हित में पालिसी बनाने में मदद मिलेगी।
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केएन उडप्पा सभागार में ‘सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम एंड वर्बल ऑटोप्सी: इम्पार्टेन्स एंड चैलेंजेज’ विषयक कार्यशाला में प्रो.वीके शुक्ल ने कहा कि डब्ल्यूएचओ के अनुसार देश की जनसंख्या के मुताबिक एक हजार की जनसंख्या में एक चिकित्सक होना चाहिए। विशिष्ट अतिथि सीएमओ डॉ. वीबी सिंह ने बताया कि जिले में एक साल में 1.20 लाख के जन्म का जबकि मृत्यु का आंकड़ा 20 प्रतिशत ही पंजीकृत है। इसके प्रति जागरूकता के लिए मीडिया, आशा, आंगनबाड़ी, एएनएम के माध्यम से अपील की जाती है। प्रो. मधु जैन ने कहा कि विश्व में हर साल 5 लाख मातृ-मृत्यु होती है जबकि भारत में अकेले 1 वर्ष में 1 लाख मौत हो रही है। कार्यशाला में एडिशनल सीएमओ डॉ. एके मौर्या, प्रो. संगीता कंसल, प्रो. रतन श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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