वाराणसी। जमीयत उलमा ए हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि किसी को ये हक नहीं है कि वो हमसे हमारी देशभक्ति का सबूत मांगे। हमारे बुजुर्गों ने भारत में रहने का फैसला किया था और इस मुल्क पर हमारा भी बराबर का हक है।
रविवार को संगठन के शताब्दी वर्ष समारोह में शिरकत करने आए मौलाना मदनी ने कहा कि कश्मीर भी हमारा है और कश्मीरी भी हमारे हैं। कश्मीर को कश्मीरियों से कोई अलग नहीं कर सकता। मुझे खुशी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे महसूस किया और इस पर बात की।
मौलाना मदनी ने कहा कि पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक से भी बड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। हम पुलवामा हमले की मजम्मत करते हैं और पूरा देश शहीद जवानों के साथ खड़ा है। जवानों का बलिदान जाया नहीं होने दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बदकिस्मती से हालात ऐसे हो गए हैं कि मुसलमान पिछले 70 साल से सफाई देता आ रहा है। पुलवामा हादसे के बाद भी वही हो रहा है। महज मीडिया ट्रायल या पुलिस के कहने भर से किसी को आतंकी नहीं माना जा सकता। उसे न्यायालय से सजा मिलनी जरूरी है। जमीयत ने पहले भी ऐसे युवाओं के केस लड़े हैं और उन्हें बाइज्जत बरी कराया है। देवबंद के पास से गिरफ्तार दोनों युवकों के मामले में जरूरत पड़ी तो जमीयत उनके केस लड़ेगा।
शताब्दी वर्ष पर सेमिनार आयोजित
जमीयत उलमा ए हिंद के शताब्दी वर्ष समारोह के तहत रविवार को मौलाना हबीबुर्रहमान आजमी के जीवन, सेवाओं एवं कार्यों पर सेमिनार का आयोजन हुआ। सेमिनार का आयोजन जमीयत के राष्ट्रीय अध्यक्ष कारी मुहम्मद उस्मान साहब मंसूर की अध्यक्षता में हुआ। सेमिनार की शुरूआत कुरान पाक की तिलावत एवं नातपाक से हुई। मौलाना मुहम्मद कासिम साहब कामी ने जमीयत का तराना पढ़ा। उन्होंने मौलाना आज़मी के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस दौरान डॉ. जफर अहमद सिद्दीकी, मौलाना बुरहानुद्दीन संभवा, मौलाना उसामा कासमी, मौलाना मुहम्मद कासिम साहब भी मौजूद रहे।