वाराणसी। सबसे बड़े कालीन आयातक देश अमेरिका के अटलांटा में पहली बार भारत कालीन प्रदर्शनी का आयोजन करने जा रहा है। 28 फरवरी से दो मार्च तक होने वाले इस आयोजन में भारत के सभी बड़े कालीन निर्यातक शामिल होंगे। इसका सीधा लाभ कालीन उद्योग के साथ बुनकरों, हस्त शिल्पियों को मिलेगा। यह बातें वस्त्र राज्यमंत्री अजय टमटा ने मंगलवार को बड़ालालपुर स्थित दीनदयाल हस्तकला संकुल में चल रहे इंडिया एक्सपो में पत्रकारों से कहीं।
बताया कि कालीन की पहचान मजबूत बनाने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। चीन के शंघई और नार्वे में भी कालीन प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। कहा कि एक लाख 25 हजार करोड़ का कपड़ा निर्यात किया गया। इसी प्रकार 35 हजार करोड़ रुपये के हस्त निर्मित उत्पाद विदेशी खरीदार को भेजे गए। बताया कि भारत से निर्यात होने वाले संपूर्ण कालीन का 60 प्रतिशत हिस्सेदारी उत्तर प्रदेश की है। तीन दिन में अब तक 348 विदेशी आयातक और 225 प्रतिनिधि एक्सपो में शामिल हो चुके हैं। कुल 270 स्टालों को मिलाकर अब 300 करोड़ के कारोबार की उम्मीद है। 2016 में विशेष शिल्पियों के लिए 32 करोड़ से मेगा क्लस्टर बनाने की वस्त्र मंत्रालय की घोषणा के बाद से अभी तक कुछ नहीं होने के सवाल पर चुप्पी साध गए। इससे पूर्व उन्होंने कालीन प्रदर्शनी को देखा और निर्यातक व खरीदारों से बातचीत भी की। विदेशी आयातकों से बताया कि वाराणसी-भदोही-मिर्जापुर क्षेत्र के लगभग 20 लाख बुनकर इस विधा से जुड़े हैं। कहा कि देश के हिसाब से कालीन को लेकर लोगों की पसंद भी बदल जाती है। यही कारण है कि वस्त्र मंत्रालय डिजाइन व रंग आदि के चुनाव के लिए डिजाइनरों की मदद ली जा रही है। उनके साथ सीईपीसी (कालीन निर्यात संवर्धन परिषद) के अध्यक्ष महावीर प्रताप शर्मा, प्रथम उपाध्यक्ष सिद्धनाथ सिंह, द्वितीय उपाध्यक्ष उमर हमीद सहित सभी प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।