सेवापुरी। कपसेठी थाना क्षेत्र के कालिका बाजार स्थित मां कालिका देवी के तालाब और भीटे पर हो रहे अवैध कब्जे के मामले में राजस्व विभाग के दावे को उसी का अभिलेख झुठला रहा है। राजस्व विभाग ने जिस भीटे की भूमि पर दूसरे काश्तकार का नाम राजस्व अभिलेख में चढ़ने का दावा किया था, उसकी पुष्टि उसी के अभिलेख नहीं कर रहे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि भूमि पर कब्जे के मामले में लगे आरोपों की जांच और कार्रवाई नहीं कर राजस्व विभाग किसे गुमराह कर रहा है और क्यूं।
बता दें कि कालिका बाजार में आराजी नंबर 31 रकबा 0.6400 हेक्टेयर, आराजी नंबर 32 रकबा 0.8250 हेक्टेयर एवं आराजी नंबर 33 रकबा 0.1540 हेक्टेयर यानी लगभग साढ़े छह बीघा भूमि राजस्व अभिलेख की खतौनी में मंदिर श्री काली जी प्रबंधक शिव प्रसाद गिरी के नाम से तालाब और भीटे के रूप में दर्ज है। उपरोक्त आराजी में किसी अन्य काश्तकार का नाम खतौनी में दर्ज नहीं है। इसके बाद भी मंगलवार को होने वाली पैमाइश को यह कह कर राजस्व विभाग के अधिकारियों ने रोक दिया कि उक्त आराजी में दूसरे काश्तकार का नाम दर्ज हो गया है।
राजस्व विभाग के लेखपाल भी मानते हैं कि तालाब और भीटे के आराजी में नहीं बल्कि बगल की आराजी में दूसरे काश्तकार का नाम दर्ज हो गया है। जिससे इस प्रकरण का कुछ भी लेना-देना नहीं। हरिभानपुर के पूर्व प्रधान शिवबंश सिंह, कालिका बाजार के पूर्व प्रधान शेष कुमार सिंह, शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि मंदिर के भीटे की भूमि को कब्जा कराने के पीछे राजस्व विभाग का हाथ है। इसीलिए मामले को उलझाया जा रहा है। वहीं राजातालाब के तहसीलदार ओमप्रकाश श्रीवास्तव अभी भी भीटे पर दूसरे काश्तकार का नाम दर्ज होने का दावा कर रहे है।