वाराणसी। काशी शर्मसार होने से बच गई। सुर्खियों में रहने वाले वरुणापार के एक स्कूल में गुरुग्राम के रायन स्कूल जैसा हादसा हो जाता। हमले के शिकार छात्र का मेडिकल कराया गया, तहरीर भी दी गई पर न जाने क्या हुआ कि 12 घंटे बाद थाने से तहरीर वापस ले ली गई और मामला रफा दफा हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने कोई बखेड़ा न हो जाए, इसलिए प्रशासन ने भी कोई जोखिम नहीं लिया है।
घटना बृहस्पतिवार की रात करीब एक बजे की है। किसी न किसी वजह से सुर्खियों में बने रहने वाले शिक्षण संस्थान के हॉस्टल में ये घटना हुई। किन्हीं न किन्हीं कारणों से इसका मालिक चर्चा में बना रहता है। ऊंची पहुंच के चलते इसके कारनामों की फाइलें दबी हुई हैं। संस्थान की छबि दिन पर दिन प्रभावित हो रही है पर स्कूल प्रशासन इसे ठीक करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठा रहा है। कक्षा ग्यारह के कुछ छात्रों के बीच बीती रात पुराने विवाद ने तूल पकड़ लिया। पड़ोसी जिले के एक छात्र के साथ उसी के साथ पढ़ने वालों ने जमकर मारपीट की। छात्र का गला दबा दिया गया, जिससे वह घायल हो गया। घायल छात्र के साथियों ने बीचबचाव न किया होता तो गंभीर हादसे को रोका जाना संभव नहीं होता।
घायल छात्र ने रात में ही अपने पिता को फोन कर सूचना दी। अभिभावकों की गुहार के बाद भी स्कूल प्रशासन का कोई अधिकारी जानकारी लेने के लिए नहीं पहुंचे। घायल छात्र और उसके साथियों ने कमरे का दरवाजा बंद कर पूरी रात दहशत में काटी। शुक्रवार की सुबह परिजनों के पहुंचने और हंगामा करने के बाद भी स्कूल प्रशासन के कानो पर जूं नहीं रेंगी। घटना की गंभीरता को देखते हुए अभिभावकों ने शिवपुर थाने में तहरीर दी। तहरीर की सूचना मिलने के बाद प्रबंधन के हाथ-पांव फूल गए। स्कूल के आला प्रबंधन से लेकर निचले स्तर पर समझौते के लिए दबाव व मामले को रफा दफा करने के लिए हथकंडे अपनाए गए। उधर, तहरीर मिलने के बाद शिवपुर थाना पुलिस ने छात्र को जिला अस्पताल में मेडिकल के लिए भेज दिया। मेडिकल रिपोर्ट में छात्र के गले पर चोट के निशान और उसका गला दबाने का जिक्र है।
मेडिकल हो गया, तहरीर दे दी गई लेकिन रात आठ बजते-बजते न जाने क्या हुआ कि अभिभावकों को तहरीर वापस लेने के लिए बाध्य होना पड़ा। बताया जाता है कि हमलावर छात्र बड़े अधिकारियों के परिवार से हैं, जो दूसरे जिलों में तैनात हैं। छात्रों का भविष्य खराब न होने की दुहाई देकर मामले को फिलहाल रफा दफा कर दिया गया। यहां एक बात स्पष्ट है कि सभी छात्र ग्यारहवीं के हैं और नाबालिग हैं, इसलिए उनके नाम का उल्लेख नहीं किया जा रहा है। करीब 12 घंटे तक चले इस ड्रामे का पटाक्षेप तथाकथित समझौते के बाद हुआ। उधर, प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है। इसके दो कारण हैं। हमलावर छात्रों के अफसरों के साहबजादे हैं और उनका दवाब सबसे अहम है।