वाराणसी। रमजान महीना अब रुखसत होने वाला है। रोजेदार ईद की तैयारियों में मशगूल हैं। रोजेदारों ने जिस नेक नियत और अकीदत के साथ रमजान के अरकानों को पूरा किया है। ठीक उसी तरह ईद के अरकान को भी पूरा करना चाहिए। तभी ईद की अस्ल खुशियों का मतलब होगा। इस बात का भी ख्याल रखना चाहिए कि शरीयत के लिहाज से ईद का दिन गुजारें।
मुगलिया मस्जिद बादशाहबाग के इमाम मौलाना हसीन बताते हैं कि ईद की खुशियां सिर्फ आपके लिए नहीं बल्कि सभी के लिए है। इसलिए ये आपकी जिम्मेदारी है कि आपके आस पड़ोस के लोग भी ये खुशियां मनाएं। पड़ोसी गरीब है तो आप भी उन सभी चीजों का इंतजाम उसके लिए करें जो अपने लिए किया है। हदीस में है कि ईद की नमाज से पहले हर किसी को चाहिए कि वो सदका-ए-फित्र अदा कर दे। ईद के दिन नए कपड़े पहनने चाहिए और हैसियत के लिहाज से खुशबू भी लगाना चाहिए। ईदगाह में नमाज अदा करना सुन्नत है इसलिए ईद की नमाज ईदगाह में अदा करनी चाहिए।