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किर्गिस्तान में फंसे एमबीबीएस करने गए यूपी के 190 छात्र, 'वंदे भारत' मिशन में भी नहीं मिल पाई सहायता

Fri, 10 Jul 2020 08:03 PM IST
गीतार्जुन गौतम अखिलानंद तिवारी, गाजीपुर

सार

  • फंसे लोगों में पूर्वांचल के 80 और  गाजीपुर में पांच छात्र
  • कोरोना संकट के चलते वतन वापसी मुश्किल हो गई
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वंदे भारत मिशन। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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विस्तार
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कोरोना महामारी के कारण यूपी से एमबीबीएस करने गए 190 छात्र किर्गिस्तान में फंसे हुए हैं। इनमें पूर्वांचल के 80 तथा गाजीपुर के भी पांच छात्र हैं। लॉकडाउन के बाद मेडिकल कालेज, कोचिंग बंद हैं। हॉस्टल भी खाली हो गए हैं। इन छात्रों की दो महीने से वतन वापसी की हर कोशिश बेकार साबित हुई है। 

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केंद्र एवं प्रदेश सरकार भी इस मुद्दे पर खामोश हैं। जबकि छात्र ई-मेल, फेसबुक, व्हाट्सएप और ट्विटर के जरिये गृह मंत्रालय, परिवहन मंत्रालय, उत्तर प्रदेश के सीएम और डीजीपी को समस्या बता चुके हैं। कोरोना काल में अपनों से दूर एमबीबीएस के ये छात्र एक-एक दिन सुबकते हुए गुजार रहे हैं। 

केंद्र सरकार ने ‘वंदे भारत' मिशन शुरू कर विदेश में फंसे छात्रों को कम खर्च में देश लाने की व्यवस्था की थी। इन छात्रों को भी भारत वंदे मिशन यात्रा से उम्मीद थी। छात्रों को आश्वासन भी मिला कि जल्द सबको घर भेजा जाएगा। लेकिन वहां फंसे कुछ छात्रों को ही यह सुविधा मिल सकी।  

गाजीपुर के अब्दुल खालिद खान, निवासी बारा, थाना दिलदारनगर, मनीष कुमार सिंह निवासी भदौरा, थाना गहमर के साथ ही सेवराई तहसील के सैफ अली खान, अब्दुल बसीत खान और मुजफ्फर अंसारी वहां फंसे हैं। पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों में 80 छात्र वहां हैं। जबकि पूरे प्रदेश के 190 से भी अधिक छात्र किर्किस्तान में हैं।
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सबने घर आने की इच्छा जताई है, लेकिन कोई सुविधा न मिलने के कारण सभी हताश और निराश हैं। सबने गृह मंत्रालय से लेकर परिवहन मंत्रालय तक से गुहार लगाई है, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। छात्रों ने अमर उजाला गाजीपुर कार्यालय से संपर्क कर बताया कि उनके पास इतने पैसे नहीं हैं कि निजी खर्च पर वहां से आ सकें।

विदेश में फंसे छात्रों की वतन वापसी के लिए पूरा प्रयास किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखा जाएगा। - आनंद स्वरूप शुक्ला, प्रभारी मंत्री

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