रबीश श्रीवास्तव
वाराणसी। बीएचयू परिसर के छात्रावासों में अब बायोगैस की मदद से भोजन बनाया जाएगा। इसके लिए विश्वविद्यालय परिसर स्थित गोशाला के बगल में बायोगैस संयंत्र केंद्र बनकर तैयार हो गया है। पहले चरण में पांच छात्रावासों का चयन किया गया है और मंगलवार को इसका ट्रायल भी हुआ। परिसर के अन्य छात्रावासों में भी यह व्यवस्था लागू करने की तैयारी चल रही है।
परिसर में करीब 84 छात्रावास हैं, जहां मेस में छात्रों का भोजन और नाश्ता बनाया जाता है। बहुत जल्द ही यहां बायोगैस की मदद से भोजन बनाया जाएगा। बीएचयू के डेयरी फार्म में करीब 500 गाय हैं और यहां भारी मात्रा में हर दिन गोबर निकलता है। इसका सही उपयोग कर बायोगैस तैयार कराया जाए, इस उद्देश्य से यहां गोशाला के बगल में संयंत्र बनाए जाने का निर्णय लिया गया था। सीपीडब्ल्यू डी और यूडब्ल्यूडी (यूनिवर्सिटी वर्क्स डिपार्टमेंट) की ओर से बनवाए गए प्लांट से हर दिन करीब 90 किलोग्राम गैस निकलेगी, जो करीब पांच से छह घरेलू गैस सिलेंडर के बराबर होगी। परिसर में छात्रावासों के पास गैस पाइप लाइन बिछाए जाने के साथ यहां मीटर सहित अन्य उपकरण भी लगाए जा चुके हैं। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की मदद से तैयार इस प्लांट की क्षमता पांच टन प्रतिदिन है। इससे तैयार होने वाली गैस एक गुब्बारे में एकत्र होगी। इसके बाद इसे एक पंप के प्रयोग से हॉस्टलों में भेजा जाएगा।