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सत्यम, शिवम, सुंदरम में समाहित है सौंदर्यशास्त्र

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वाराणसी। बीएचयू के भारत अध्ययन केंद्र में चल रहे दस दिवसीय कार्यशाला के पांचवें दिन पंचतंत्र के कलात्मक विर्मश पर चर्चा हुई। बतौर मुख्य वक्ता महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के दर्शन विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विष्णु दत्त पांडेय ने कहा कि सौंदर्यशास्त्र का आदर्श सत्यम, शिवम, सुंदरम सूत्र वाक्य पर आधारित है। इसी का भाव रुप पंचतंत्र में भी दिखता है।
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कलात्मक दृष्टि से पंचतंत्र का मूल्यांकन करते हुए उन्होंने बताया कि कला और सौन्दर्य की जो झलक हिन्दी साहित्य की छायावादी कविताओं में दिखता है वह पश्चिमी अभिव्यंजनावाद और रोमेंटिसिज़्म द्वारा आयातित प्रतीत होता है। लेकिन पंचतंत्र इस मिथक को तोड़ता है। पंचतंत्र का उपदेश सूक्ति सागर है। महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के कुलाधिपति प्रो. कमलेश दत्त त्रिपाठी ने राजनीतिक सिद्धांतों में पंचतंत्र के सूत्रों की चर्चा करते हुए कहा कि राजनीति राष्ट्र को स्थापित करने का सिद्धांत है। यदि शक्ति संचय न हो पाये तो शत्रु के समान बलवान व्यक्ति से समझौता करें। इस दौरान डॉ. मलय कुमार झा, डॉ. आशुतोष त्रिपाठी, गीता योेगेश भट्ट, ईशान त्रिपाठी, प्रो. सदाशिव कुमार द्विवेदी, डॉ. अनूप पति तिवारी, गोविंद कुमार, राजीव झा आदि मौजूद रहे।
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