वाराणसी। समाजवादी नेता जार्ज फर्नांडिस का बनारस से गहरा रिश्ता था। बतौर रक्षामंत्री के निजी सचिव और लंबे समय तक साथ रहने वाले समाजवादी चिंतक विजय नारायण सिंह ने बताया कि 26 जून 1975 को जार्ज ने इमरजेंसी विरोधी अभियान की शुरुआत बनारस के राजघाट स्थित गांधी विद्या संस्थान से की थी। इमरजेंसी के समय गिरफ्तारी से बचने के लिए वे सिख पत्रकार के रूप में रहते थे। हालांकि 10 जून 1976 को उन्हें 10 लोगों के साथ कोलकाता से गिरफ्तार किया गया था।
उन्होंने बताया कि 13 मार्च को इंदिरा गांधी की काशी विद्यापीठ में सभा होने वाली थी। इससे पहले फर्नांडिस बनारस में पत्रकार विक्रम राव से मिले। तय हुआ कि 1942 की तरह डायनामाइट विस्फोट कर तानाशाही के खिलाफ आवाज केंद्र तक पहुंचाई जाएगी। डायनामाइट की खेप आठ मार्च 1976 को बड़ौदा से बनारस के चौक स्थित अधिवक्ता राधेश्याम सिंह की दवा की दुकान के पते पर मेडिसिन लिखकर आने वाली थी। इसी दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने गुजरात सरकार को बर्खास्त कर दिया। पुलिस को मौका मिल गया और बड़ौदा से विक्रम राव को गिरफ्तार कर लिया गया। वहां की पुलिस चौक आई और राधेश्याम को भी बड़ौदा ले गई। डायनामाइट से किसी को नुकसान पहुंचाने का उद्देश्य नहीं था, इसके बावजूद देशद्रोह का मुकदमा चला।
फर्नांडिस बीएचयू और काशी विद्यापीठ के छात्रसंघ कार्यक्रम में आते थे। जेपी आंदोलन में शामिल होने के लिए बनारस से बाइक से 250 किमी की दूरी तय करके राधेश्याम ने उन्हें पटना पहुंचाया। 1974 की रेल हड़ताल में वह डीरेका आए थे। आखिरी बार वह 2010 में काशी विद्यापीठ में राजनारायण की मूर्ति का अनावरण करने आए थे। इसके बाद अल्जाइमर बीमारी से ग्रस्त हो गए। पिछले नौ साल से वह कोमा में थे। 1963 से मेरा और उनका साथ रहा। आखिरी मुलाकात तीन जून 2018 को दिल्ली में हुई थी।
पप्पू की चाय की अड़ी पर घंटों बात करते थे
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अशोक पांडेय ने बताया कि जार्ज फर्नांडिस अस्सी स्थित पप्पू की चाय की अड़ी पर आते थे। यहां बीएचयू, काशी विद्यापीठ और बुद्धिजीवियों के साथ सम सामयिक विषयों पर घंटों बात करते थे। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के अध्यक्ष महेंद्र सिंह यादव ने कहा कि ऐसा समाजवादी नेता खो दिया, जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती है। जनता दल यूनाईटेड प्रदेश अनुशासन समिति के प्रदेश अध्यक्ष श्रीनाथ सिंह पटेल ने कहा कि जार्ज समाजवाद राजनीति के बड़े नेता थे। उनके निधन से समाजवादी युग का अंत हो गया।