वाराणसी। बच्चों को चुरा कर उन्हें बेचने वाले गिरोह के तीन सदस्य शुक्रवार को सिटी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर तीन से गिरफ्तार किए गए। तीनों की शिनाख्त चौकाघाट झोपड़पट्टी की सीमा चौहान व गोपाल साहनी और पश्चिम बंगाल के सियालदह की रूबी के तौर पर हुई। तीनों के चंगुल से आदमपुर के बलुआबीर निवासी राजू गुप्ता का ढाई साल का अपहृत बेटा मुक्त कराया गया। तकरीबन 23 दिन बाद अपने बच्चे को देख कर राजू और उनकी पत्नी की आंखों से आंसुओं की धार रुकने का नाम नहीं ले रही थी।
राजू के अनुसार बीते 28 नवंबर को उसका ढाई साल का बेटा और घर में 15 दिन से काम करने आ रही सीमा अचानक गायब हो गई। इस संबंध में आदमपुर थाने पर मुकदमा दर्ज कराया गया। प्रभारी निरीक्षक आदमपुर राजीव सिंह ने बताया कि शुक्रवार की सुबह साढ़े छह बजे के लगभग पता लगा कि बच्चे के साथ सीमा सिटी रेलवे स्टेशन पर भीख मांग रही है तो उसे गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में सामने आए तथ्यों के आधार पर सीमा के सहयोगी गोपाल और रूबी को गिरफ्तार किया गया। सीमा ने बताया कि वो बच्चे को टाफी देने के बहाने बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गई थी। बच्चे को मदन राजपूत नामक शख्स को बेचने की बात तय हुई थी। मदन ने बच्चा लेने से इंकार कर दिया तो उसे बेचने तीनों महेंद्रगढ़ गए। वहां भी कोई खरीदार नहीं मिला तो वापस लौट आए। सियालदह जाने की तैयारी थी इसी बीच पकड़ लिए गए।
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सत्यापन के बगैर ना रखें नौकर
इंस्पेक्टर आदमपुर ने कहा कि समूचे प्रकरण में राजू से गलती यही हुई कि उन्होंने बगैर सत्यापन के ही सीमा को अपने घर में नौकरानी का काम दे दिया और उन्हें इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। इसलिए बगैर सत्यापन कराए नौकरों को घर पर काम न दें।