ज्ञानपुर। भीषण गर्मी में हरी सब्जियां आम जन की थाली से दूर हो रहीं हैं। आलू-टमाटर से लेकर भिंडी, करेला और परवल तक के दाम में हफ्तेभर के अंदर भारी वृद्धि हुई है। इससे लोगों की रसोई का बजट गड़बड़ाने लगा है। हफ्तेभर पूर्व तक 12 से 14 रुपये किलो के हिसाब से बिक रहा आलू इन दिनों 18 से 20 रुपये किलो पहुंच गया है। इसी तरह 20 रुपये प्रति किलो बिकने वाला परवल 40 रुपये किलो मिल रहा है। टमाटर के भाव तीन गुना से ज्यादा बढ़ गए हैं। खीरा, भिंडी, बैगन, करेला, लौकी और कद्दू समेत कई दूसरी सब्जियों के दाम में भी वृद्धि हुई है।
हरी सब्जियां रोज की घर-घर की जरूरत होती हैं। बिना सब्जियों के भोजन का स्वाद फीका हो जाता है। मगर इन दिनों महंगाई की मार के चलते हरी सब्जियां सामान्य लोगों की थाली से दूर होने लगी हैं। सब्जियों का राजा कहे जाने वाले आलू पर भी महंगाई का डंडा चला है। जिले की सब्जी मंडियों में आलू ने हफ्तेभर के अंदर छह रुपये की छलांग लगाई है। 12 रुपये से बढ़कर यह 16 से 18 रुपये प्रति किलो के फुटकर रेट में बिक रहा है। इसी तरह करेला, बैगन, भिंडी आदि सब्जियों के दाम में भी बढ़ोतरी हुई है। इससे तमाम घरों की रसोई का बजट हिल गया है। हालांकि खाने वाले बढ़े दाम के बाद भी सब्जियों के सेहत से भरे कुदरती स्वाद और जायका लेने से पीछे नहीं हट रहे। सब्जियों के दाम में बढ़ोतरी मंडियों में कम आवक की वजह से मानी जा रही है। सब्जी दुकानदार गुलाबचंद्र ने कहा कि बारिश न होने के कारण सब्जियों के उत्पादन पर असर पड़ा है। शायद यही वजह है कि मंडियों में हरी सब्जियों की पर्याप्त आवक नहीं हो पा रही है। मौसम ऐसा ही रहा तो सब्जियों के दाम में और बढ़ोतरी हो सकती है। बृहस्पतिवार को बाजार में सब्जी लेने पहुंचे नीतेश श्रीवास्तव ने कहा कि सब्जियों की कीमतों में वृद्धि से मुश्किलें बढ़ीं हैं। हालांकि यह रोज की जरूरत है, इसलिए खाने वाले तो खाएंगे ही। लेकिन सब्जियों के दाम बढ़ने से जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने लगा है। इसके कारण जो हरी सब्जी एक किलो खरीदी जाती थी, उसे अब आधा किलो में ही काम चलाना पड़ रहा है।