भदोही। गंगा में प्रदूषण पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के तल्ख रुख से भदोही नगर पालिका के अधिकारियों की धड़कनें बढ़ गईं हैं। गंगा में बढ़ते प्रदूषण पर कारगर कदम न उठा पाने को लेकर एनजीटी ने नपा के अधिकारियों को तलब किया है। इसके मद्देनजर बुधवार को नगर पालिका में गहमागहमी बढ़ी दिखी। फाइलें ओके दिखाने और प्रदूषण से बचाव के लिए की गई तैयारियों का डेटा सहेजा जा रहा है।
शहर का सीवेज गंगा में बहने से नहीं रोक पाने को लेकर भदोही नगर पालिका परिषद एक बार फिर से राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के निशाने पर है। नपा की अधिशासी अधिकारी पूर्णिमा आगामी 27 जून को एनजीटी न्यायालय में पेश होंगी। उनका कहना है कि सीवेज रोकने के लिए नगर पालिका स्तर से कुछ भी बाकी नहीं रह गया है। कहा कि प्राधिकरण को वस्तुस्थिति से अवगत कराया जाएगा। बताया कि वह प्राधिकरण को बताएंगी कि इस संबंध में पालिका ने क्या-क्या कदम उठाए हैं। भदोही नगर पालिका जिले का सबसे बड़ी नगर निकाय है। यहां से प्रतिदिन निकल रहे 11 एमएलडी सीवेज को बगैर शुद्ध किए नगर की तीन दिशाओं में मोरवा और वरुणा नदियों में बहाया जा रहा है। जो बाद में गंगा में पहुंच जाता है। एनजीटी इसी बात को लेकर नाराज है। उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वाद पर सुनवाई के दौरान कम से कम तीन बार एनजीटी अधिकारियों की टीम भदोही नगर का दौरा कर चुकी है। टीम के लोग यह देख चुके हैं कि फौरी तौर पर सीवेज शुद्धीकरण तो नहीं हो सकता, लेकिन इस संबंध में बहुत पहले ही यहां जलशोधन प्लांट (ईटीपी) स्थापना का निर्देश दिया जा चुका है। प्राधिकरण में तलब की गईं ईओ पूर्णिमा ने कहा कि वे एनजीटी के दिशा निर्देशों को लेकर गंभीर हैं। यह समस्या वर्षों पुरानी है। यहां सीवर व्यवस्था सुदृढ़ कर मामदेव में जलशोधन प्लांट की स्थापना की जानी है, जिसके लिए मामदेवपुर में ईटीपी स्थापना का प्रस्ताव बनाकर जलनिगम को प्रेषित कर दिया गया है। कार्य जलनिगम को कराना है। इसमें नगर पालिका को केवल जमीन उपलब्ध कराना था, जो किया जा चुका है।