वाराणसी। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के लिए मंदिर परिक्षेत्र के प्राचीन भवनों और मंदिरों को ध्वस्तीकरण से नाराज संत समाज ने इस मुद्दे पर एकजुट संघर्ष के संकेत दिए हैं। संन्यासियों और वैष्णव संतों ने गुरुवार को केदारघाट स्थित विद्यामठ में बैठक के दौरान सर्वसम्मति से धर्माचार्य परिषद के गठन का प्रस्ताव पारित किया। साथ ही, तय हुआ कि जल्द ही साधु-संतों का दल इस सिलसिले में मुख्यमंत्री से मिलेगा।
विद्या मठ में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान महंत मोहनदास ने कहा कि यदि हम सच्चे हिंदू हैं, धर्म को मानते हैं और गुरु को मानते हैं तो हमें एकजुट आवाज उठानी होगी। महंत रामेश्वर दास और महंत रामदास ने भी संत समाज से इस मुद्दे पर एकजुट संघर्ष का आह्वान किया। महंत गोविंद दास ने कहा कि प्राचीन मंदिरों को ध्वस्त नहीं कराया जाना चाहिए। ये मंदिर काशी की पहचान हैं। महंत रामकरण दास, स्वामी ईश्वरानंद तीर्थ और महंत राम लोचन दास ने कहा कि सरकार को तत्काल इस मसले पर गंभीर होना होगा और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रोकनी होगी। बैठक में पातालपुरी मठ के महंत बालकदास, राजेंद्र तिवारी, कृष्ण कुमार, प्रमोद माझी, स्वामी प्रह्लाद आश्रम, महंत दीनदयाल दास, रामेश्वर दास, पद्माकर पांडेय, एके लारी, राजेश्वर तिवारी, मणिशंकर, स्वामी राजदेवानंद तीर्थ, स्वामी जितेंद्रनाथ तीर्थ, स्वामी अनुजाश्रम, स्वामी प्रबुद्ध आश्रम, रामदेव आश्रम, स्वामी रामविलास दास, स्वामी देवाश्रम, स्वामी चंद्रा आश्रम, स्वामी केदारानंद तीर्थ, स्वामी जनकेश्वरानंद तीर्थ, विजय रामदास कोतवाल, डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र, सावित्री पांडेय, श्रीप्रकाश पांडेय, दीपेश दुबे आदि उपस्थित रहे। संचालन मयंक शेखर मिश्र ने किया ।
शंकराचार्य ने कहा, काशी में हो रहा अनर्थ
बैठक के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ज्योतिष्पीठ एवं द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को फोन पर इस पूरे प्रकरण की जानकारी दी। शंकराचार्य ने कहा कि काशी में मंदिरों को तोड़ा जाना अनर्थ है। ऐसा नहीं होना चाहिए। सरकार तत्काल संज्ञान ले और इसे रोके। मंदिरों, मूर्तियों को संरक्षित करे।