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रसातल में जा रहा धरातल का पानी

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वाराणसी। दिन-रात हो रहे जल के दोहन ने लोगों के सामने जल संकट खड़ा कर दिया है। बनारस में स्थिति बहुत खराब है। पिछले सात सालों में यह जलस्तर एक से दो मीटर तक नीचे चला गया है। कई क्षेत्रों में सूखे की स्थिति बन गई है। समस्या के समाधान के लिए कोई कारगर उपाय होते नहीं दिख रहे।
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पेड़ पौधों को काटकर बनाए जा रहे कंक्रीट के जंगल से लगातार जल स्तर कम होता जा रहा है। शहर के तालाब और कुंड अपने वजूद के लिए जूझ रहे हैं। पानी के अभाव में सभी सूख चुके हैं, जो पानी बचा भी है वह इतना गंदा है कि उससे संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। शहर में पेयजल के लिए लगाए गए ट्यूबवेल भी पानी छोड़ने की कगार पर पहुंच चुके हैं। यही स्थिति रही तो आने वाले 10 सालों में काशी शहर को पानी के लिए तरसना पड़ेगा। ऐसे में लोगों में जल के दोहन को लेकर जागरूकता लानी होगी, तब जाकर बूंद-बूंद को संरक्षित किया जा सकेगा।
ये है भूगर्भ की स्थिति मीटर में
क्षेत्र- वर्ष 2011--2017
काशी विद्यापीठ - 11.57--12.5
सारनाथ 12.2-- सूखा
चोलापुर 11.40--11.65
पिंडरा 17.35--सूखा
पांडेयपुर 6.60--7.60
लंका क्षेत्र 6.81-- 7.1
मलदहिया 19.85--20.60
कपसेठी 12.55--14.80
शहर में एक दर्जन ट्यूबवेल रिबोर की स्थिति में
शहर में चाहे जितना नगर निगम की ओर से व्यवस्थाएं की गई हों, इसके बाद भी करीब एक दर्जन ट्यूबवेल सूखे की मार झेल रहे हैं। जल निगम ने इनकी सूची बना ली है, जो इस माह के अंत तक उनको रिबोर किए जाने है। ये सभी पंप अब तक 180 से 200 फीट तक चल रहे थे, जिन्हें अब 200 से 220 फीट नीचे किया जाएगा। अगर इन सभी बोरिंगों को रिबोर नहीं किया गया तो उन क्षेत्रों के लोगों को पेयजल के लिए जूझना पड़ेगा।
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