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वोटिंग में नहीं तोड़ पाए पिछले साल का रिकार्ड

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ाराणसी। राजनीति की पहली पाठशाला कहे जाने वाले छात्रसंघ चुनाव में उत्साह के साथ मतदान तो हुआ लेकिन मतदाता पिछले साल का रिकार्ड नहीं तोड़ पाए। सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक चले मतदान में 58.10 प्रतिशत वोटिंग हुई जबकि पिछले साल 60.08 फीसदी वोटिंग हुई थी। शुरुआत के दो घंटे में दस फीसदी मतदान हुआ। इसके बाद दोपहर एक बजे तक मतदान में तेजी बनी रही लेकिन उसके बाद बवाल के चलते रफ्तार धीमी हो गई। दोपहर एक बजे तक 52.81 फीसदी तक वोटिंग हुई थी। इसके बाद के एक घंटे यानी दो बजे तक वोटिंग प्रतिशत छह फीसदी ही बढ़ पाया। बवाल, पथराव के चलते कई छात्र-छात्राएं बिना वोट किए ही लौट गए। इस बार कुल 8133 मतदाताओं में से 4725 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इसमें छात्रों की संख्या 3210 और छात्राओं की संख्या 1515 रही। इस तरह 66.34 फीसदी छात्रों और 45.97 फीसदी छात्राओं ने वोट डाले।
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‘ए भैया, एक ठे वोटवा दे दा भैया...’
काशी विद्यापीठ के छात्रसंघ चुनाव में कई प्रत्याशियों का वोट मांगने का अंदाज अनोखा रहा। मतदाताओं को रिझाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कोई हाथ जोड़ रहा था, पांवों पर गिर जा रहा था तो कोई रोते-बिलखते हुए अपनी अरजी लगा रहा था। महामंत्री पद की प्रत्याशी अंकिता सिंह लगातार छात्रों से रो-रोकर वोट मांगती रहीं। वो लगातार कहती रहीं, ‘...ए भैया, एक ठे वोटवा दे दा भैया’। दूसरे प्रत्याशियों ने भी आंखों में आंसू भर कर वोट का आशीर्वाद मांगते रहे।
339 ने दबाया नोटा का बटन, 246 अवैध वोट
विद्यापीठ के छात्रसंघ चुनाव में नोटा का बटन भी मतदाताओं ने खूब इस्तेमाल किया। कुल 4725 वोट में 339 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया, यानी कि मतदाताओं की नजर उनके लिए एक भी प्रत्याशी उनके मन मुताबिक नहीं था। सर्वाधिक महामंत्री पद के लिए 85 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया। वहीं अध्यक्ष पद पर 36, उपाध्यक्ष पर 55 और पुस्तकालय मंत्री 73 ने नोटा का इस्तेमाल किया। नोटा से इतर 246 अवैध वोट भी पड़े।
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छात्राओं का नहीं चला जोर
काशी विद्यापीठ के छात्रसंघ चुनाव में इस बार छात्राओं को जोर नहीं चला। दो प्रमुख पदों पर छात्राएं चुनाव मैदान में थीं। महामंत्री पद तक अंकिता सिंह और पुस्तकालय मंत्री पद पर कुमारी माया। अंकिता अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पैनल से चुनाव मैदान में थीं। दोनों ही प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत पाईं।
‘बागियों’ के तेवर से मुरझा गया भगवा परचम
वाराणसी। छात्रसंघ चुनाव में बागियों ने अपने तेवर से सियासत की बाजी पलट दी। भगवा परचम तो मुरझाया ही, कई धुरंधर भी चित हो गए। इस बार बागियों की बादशाहत रही। सत्ता की हनक और धुआंधार प्रचार के बाद भी एबीवीपी किसी पद पर जीत हासिल नहीं कर सकी।
पूर्वांचल की सियासत में युवाओं का रुझान बताने वाले इस छात्रसंघ चुनाव के परिणाम के कई मायने निकाले जा रहे हैं। काशी विद्यापीठ छात्रसंघ चुनाव की घोषणा के साथ ही तय हो गया था कि भगवा परचम के खिलाफ अन्य दल एक साथ उतरेंगे। इसीलिए समाजवादी छात्र सभा और एनएसयूआई ने साझा प्रत्याशियों का पैनल उतारा। हालांकि यहां भी बागियों की चाल ने समीकरण बिगाड़ दिया। बतौर बागी अध्यक्ष पद पर उतरे राहुल दुबे और महामंत्री अनिल यादव ने जीत का परचम लहराया। सूत्रों की मानें तो एबीवीपी का भी एक गोल बागियों के साथ खड़ा रहा। नतीजा यह हुआ कि पिछले साल की एक सीट (महामंत्री) भी एबीवीपी के हाथ से फिसल गई। पिछले साल तीन सीटों पर समाजवादी छात्र सभा काबिज थी लेकिन इस बार उसके और एनएसयूआई के साझा पैनल के हिस्से दो सीटें आई हैं। उधर, चुनाव जीतने के बाद अध्यक्ष राहुल दुबे ने समाजवादी छात्र सभा का दामन थामे रहने की घोषणा की है, इससे सछास खेमे में खुशी की लहर दिखी।
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छात्रों के हितों के लिए मैं हमेशा खड़ा रहूंगा। विश्वविद्यालय के पठन-पाठन को और सुदृढ़ बनाने की कोशिश रहेगी। - राहुल दुबे, अध्यक्ष
विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने की मांग को मजबूती दूंगा। छात्र हितों के प्रति समर्पित रहूंगा। - अनिल यादव, महामंत्री
पठन-पाठन का माहौल और बेहतर हो, इसकी कोशिश होगी। छात्रों की उम्मीदों पर खरा उतरूं, यही प्रयास होगा। - रोशन कुमार, उपाध्यक्ष
पुस्तकालय की दशा में सुधार ही मेरा मुद्दा है। साइबर लाइब्रेरी की सुविधा दिलाना मेरी प्राथमिकता में है। - रवि प्रताप सिंह, पुस्तकालय मंत्री
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