वाराणसी। केंद्र सरकार के नए फैसले से काशी में मेट्रो दौड़ाने के सपने का तगड़ा झटका लगा है। नई मेट्रो रेल पॉलिसी के चलते केंद्र को भेजी गई डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) वापस कर दी गई है। परियोजना पर केंद्र की स्वीकृति के लिए अब डीपीआर में बदलाव करने हाेंगे। मेट्रो की राह में नई अड़चन के बाद इस परियोजना की नोडल संस्था वीडीए को अब शासन के आदेश का इंतजार है।
16 अक्तूबर, 2016 को मेट्रोमैन श्रीधरन ने बीएचयू से भेल और बेनियाबाग से सारनाथ तक 29 किमी लंबे मेट्रो कॉरिडोर परियोजना का खाका खींचा था। उन्होंने प्रस्तावित मेट्रो रूट का निरीक्षण भी किया था। तब श्रीधरन ने 2021 तक पहले चरण में मेट्रो चलाने की बात कही थी। इस परियोजना पर 17.258 हजार करोड़ रुपये खर्च होने थे। केंद्र ने नई पॉलिसी के हिसाब से डीपीआर में कई संशोधन करने के लिए शहरी विकास विभाग को प्रस्ताव वापस भेजा है। नई पॉलिसी इसी साल अगस्त में केंद्रीय कैबिनेट में पास की गई थी। वाराणसी के साथ ही यूपी के पांच और शहरों की भी डीपीआर लौटा दी गई है। वाराणसी मेट्रो की डीपीआर लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन और वीडीए ने मिलकर तैयार की थी। इसे राज्य सरकार ने फरवरी 2016 को स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार को भेजा था। वीडीए के उपाध्यक्ष पुलकित खरे ने बताया कि केंद्र ने राज्य सरकार को डीपीआर वापस कर दी है लेकिन अभी शासन से इस संबंध में कोई निर्देश नहीं मिला है। नए दिशा-निर्देश मिलते ही उसके मुताबिक काम आगे बढ़ाया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक नई मेट्रो पॉलिसी प्रोजेक्ट का खर्च कवर करने के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप को प्रॉपर्टी डेवलपमेंट और व्यावसायिक गतिविधियों का समर्थन करती है। हालांकि केंद्र का कहना है कि इससे क्षमता बढ़ेगी और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।