सेवापुरी। अधिकारियों और ठेकेदारों द्वारा जले ट्रांसफार्मरों को सरकारी भाड़े पर ढुलाई करने के बजाय उपभोक्ताओं से उनके खर्चों पर ट्रांसफार्मर को वर्कशाप पहुंचाने और ले आने के नाम पर लाखों रुपये के गोलमाल के मामले को अमर उजाला ने शनिवार को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो महकमे में अफरातफरी मच गई। विद्युत विभाग के आलाधिकारियों ने मामले को गंभीर मानते हुए वर्कशाप के अधिशासी अभियंता को सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया। इस क्रम में वर्कशाप के अधिशासी अभियंता ने मंडल के वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर और जौनपुर के संबंधित अधिकारियों को कड़ा निर्देश देते हुए निजी वाहनों से जले ट्रांसफार्मर वर्कशाप ले जाने और ले आने पर रोक लगा दी। साथ ही संबंधित अधिकारियों को चेतावनी दी कि इसमें किसी तरह की कोताही बरती गई तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। बता दें कि शासन ने जून माह से जले ट्रांसफार्मरों को वर्कशाप की कार्यदायी संस्थाओं के माध्यम से सरकारी खर्चे पर ले आने और ले जाने का निर्देश दिया है। किंतु वर्कशाप के अधिकारी और ठेकेदारों ने शासनादेश के विपरीत उपभोक्ताओं से उन्हीं के खर्चे और उन्हीं के वाहन से जले ट्रांसफार्मरों को ले आने व ले जाने को मजबूर किया। वहीं स्थानीय जेई से इंडेंट बनवाकर ट्रांसफार्मर ढुलाई का भुगतान सरकार से भी ले लिया। यह कार्य पूरे जिले में किा जा रहा था। भाजपा के जिला महामंत्री व आईटी सेल वाराणसी के प्रभारी प्रभात सिंह ने बताया कि वर्कशाप के अवर अभियंता व कार्यदायी संस्थाओं के ठेकेदार द्वारा उपभोक्ताओं के साथ खुले आम मनमानी की जाती है। और उनसे पहले ट्रांसफार्मर देने के नाम पर मोटी रकम वसूलने के बाद उन्हें ट्रांसफार्मर दिया जाता है। इस मामले की शिकायत पूर्वांचल वितरण निगम के एमडी से कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।