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ऐप के जरिये होती है आईपीएल में ऑनलाइन सट्टेबाजी

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वाराणसी। एसटीएफ ने आईपीएल में ऑनलाइन सट्टा लगाए जाने की सूचना पर मंगलवार की रात सुंदरपुर नेवादा क्षेत्र की गणेशधाम कॉलोनी स्थित मकान में छापेमारी कर तीन सटोरियों को 27.75 लाख रुपये के साथ गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई की लंका थाने की पुलिस को भनक तक नहीं लगी जबकि इतने बड़े पैमाने पर सट्टा खेला जा रहा था। इससे पहले 29 मार्च को क्राइम ब्रांच और आदमपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने विजयीपुर कोनिया में छापेमारी कर आठ लाख 10 हजार रुपये के साथ तीन सटोरियों को गिरफ्तार किया था।
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एसटीएफ की पूछताछ में सामने आया कि विश्वास की नींव पर टिका सट्टा मुंबई निवासी बुकी अमन के माध्यम से ऑरेंज लाइव ऐप को लैपटॉप में डाउनलोड कर खेला जाता है। यह ऐप लंदन की एक कंपनी ने बनाया है। इसमें बुकी, एजेंट, फील्ड के लड़कों का विवरण, जीत-हार रही टीम का ब्योरा, बेटिंग रेट, आईपी इंडेक्स आदि लाइव दिखता है। लैपटॉप में लाग मेंटेन होता रहता है। ऐप में जो भी बेटिंग रेट दिखता है उसे बुकी बेटिंग बाक्स में लगे माइक से एनाउंस करता है। बाक्स में बुकीज के मोबाइल ऑनलाइन होते हैं जो भाव सुन कर दांव लगाते हैं। बाक्स में लगे स्पीकर के माध्यम से मुख्य बुकी अन्य बुकी की आवाज सुनता है और बातचीत रिकार्ड भी होती है। मुख्य बुकी व उससे जुडे़ अन्य बुकी के बीच पैसे के लेनदेन में विवाद की स्थिति में रिकार्ड आवाज को सुनाकर समाधान किया जाता है।
जीतू के संपर्क में आने के बाद अजय ने शुरू की सट्टेबाजी
एसटीएफ के अनुसार, जीतू ने 1997 से 2006 तक दुबई में रहकर ट्रेडिंग कंपनी चलाई और सट्टेबाजी में महारथ हासिल की। सट्टेबाजी से हुई आय से उसने मुंबई, लखनऊ, फतेहपुर और कानपुर में मकान खरीदा। फतेहपुर में पेट्रोल पंप खोलने के साथ ही जीतू मर्सिडीज जैसी गाड़ियों का मालिक है। जीतू के संपर्क में आकर अजय सिंह ने अपने साले आशीष शिवहरे के साथ सट्टेबाजी शुरू की। जीतू के संपर्क वाराणसी के अलावा दिल्ली, मुंबई, अजमेर, आगरा, रायपुर, लखनऊ, फतेहपुर और कानपुर के सट्टेबाजों से हैं। आरोपी पुलिस को दबाव में लेने के लिए अपने वाहनों पर प्रेस लिख कर चलते थे और खुद को पत्रकार बताते थे।
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काम बताता था वेब पोर्टल का संचालन, कराता था सट्टेबाजी
एसटीएफ के अनुसार प्रकरण में वांछित अजय सिंह खुद को एक वेब पोर्टल का संचालक बताता है लेकिन वास्तविकता में काम सट्टेबाजी का करता है। ऐसे ही दर्जनों वेब पोर्टल जिले में संचालित हैं और इनकी मानीटरिंग की कोई व्यवस्था नहीं है। जानकारों की मानें तो निगरानी की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण यह वेब पोर्टल लोकसभा चुनाव के दौरान अफवाहें फैलाने या दुष्प्रचार का एक बड़ा माध्यम बन सकते हैं। इसलिए इनकी नियमित निगरानी की ठोस व्यवस्था की जानी चाहिए। इस संबंध में जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि वेब पोर्टल और व्हाट्स ऐप ग्रुपों की गतिविधियों पर जिला प्रशासन की नजर है। आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन होने पर संबंधित पोर्टल या व्हाट्स ऐप ग्रुप के एडमिन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करने में देरी नहीं की जाएगी।
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