वाराणसी। जिले में वेक्टर जनित (मच्छर, टिक्स आदि) बीमारियों के रोगियों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। डेंगू की तुलना में मलेरिया पीड़ितों की संख्या तेजी से बढ़ी है। 2017 में 5,497 मलेरिया के मरीज मिले थे, 2018 में यह संख्या 67272 तक पहुंच गई। इस साल फरवरी तक ही मलेरिया से पीड़ितों की संख्या 5,919 पहुंच चुकी है। तेजी से बढ़ रहे मरीजों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने वेक्टर जनित बीमारियों से निपटने की तैयारी शुरू कर दी है।
मौसम में बदलाव होने के साथ ही बीमारियां बढ़ने लगती है। राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिले में चिकनगुनिया, डेंगू, मलेरिया और फाइलेरिया के मरीजों का आंकड़ा जुटाया जा रहा है। साथ ही बीमारियों के कारण और बचाव के बारे में जागरूक किया जा रहा है। वैसे जिले में पिछले तीन सालों में चिकनगुनिया और जापानी इंसेफेलाइटिस (दिमागी बुखार) का एक भी मरीज नहीं मिला, लेकिन डेंगू और मलेरिया के मरीजों के मिलने का क्रम जारी है। जिला मलेरिया अधिकारी शरत चंद्र पांडेय ने बताया कि मौसम में बदलाव से मच्छरों की संख्या फरवरी और मार्च में बढ़ जाती है जिससे इन बीमारियों का खतरा रहता है। मई और जून में भी मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की संभावना है, इससे निपटने की तैयारी की जा रही है।
मच्छर जनित बीमारियों के लक्षण
तेज व अचानक बुखार आना, सरदर्द होना, नाक बहना, थकावट महसूस होना, बैचनी महसूस होना, त्वचा पर रैसेज हो जाना बीमारियों के लक्षण है। समय से लार्वीसाइड्स का छिड़काव किया जाए तो मच्छरों के लार्वा शुरुआती चरण में ही नष्ट हो जाते हैं।
वर्ष 2017 से फरवरी 2019 तक मरीजों का आकड़ा
वर्ष मलेरिया डेंगू फाइलेरिया कालाजार
2017 5497 107 12 -
2018 6727 327 23 1
2019(फरवरी) 5919 2 - -