वाराणसी। बीएचयू परिसर में जब भी मारपीट, पत्थरबाजी, आगजनी की घटनाएं होती हैं, तब कड़ी सुरक्षा और शांतिमय माहौल का दावा किया जाता है लेकिन यह दावा बेकार साबित हो पा रहा है। बीएचयू में मंगलवार को सोलह दिन के भीतर एक बार फिर माहौल बिगड़ गया। इससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा होने लगा है। इससे पहले स्पंदन के दौरान 24-25 फरवरी को भी मारपीट, पत्थरबाजी, आगजनी हुई थी।
परिसर की सुरक्षा को लेकर हर साल नौ करोड़ से अधिक खर्च होते हैं। 900 सुरक्षा कर्मियों के साथ ही जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। इसके बावजूद कभी बाहरी छात्र परिसर में घुसकर मारपीट कर चले जाते हैं तो कभी परिसर के ही छात्रों के दो गुटों में मारपीट हो जाती है। मंगलवार को भी कला संकाय के सामने जिस जगह चाय की दुकान के पास मारपीट और हवाई फायरिंग हुई, पास ही सुरक्षा कर्मी मौजूद रहते हैं। यही नहीं, सुबह 10 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक हर दिन 40-50 छात्र-छात्रा भी खड़े दिखते हैं। इसके बावजूद शाम करीब चार बजे मारपीट और फायरिंग बाद आरोपी वहां से भाग निकले और वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश तक नहीं की। छात्रों का कहना है कि अगर सुरक्षा कर्मी हस्तक्षेप करते तो छात्र को इतनी चोट नहीं आती।
छात्रावासों में मिले पत्थर, खाली बोतल और रॉड
बिड़ला चौराहे पर पत्थरबाजी के बाद चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयाना सिंह ने बिड़ला और एलबीएस हॉस्टल में सर्च अभियान चलाया। प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्यों और सुरक्षा कर्मियों के साथ पहुंचकर कमरों के साथ ही अन्य जगहों की तलाशी ली गई। पूछताछ में चीफ प्रॉक्टर ने बताया कि इस दौरान दोनों हॉस्टलों से बोरे में रखे पत्थर, सीढ़ी के नीचे छिपाकर रखे गए खाली बोतल मिले। बताया कि बोतलों को पेट्रोल बम बनाने के लिए रखा गया था। इसके अलावा हॉस्टलों से लोहे की रॉड भी मिले हैं। चीफ प्रॉक्टर ने कहा कि परिसर का माहौल बिगाड़ने वालों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।