मिर्जापुर। राष्ट्रीय राजमार्ग सात पर टेंगरा मोड़ से भैसोड़ बलाय तक 122 किलोमीटर लंबे निर्माणाधीन फोरलेन में पेच फंसता नजर आ रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय की ओर से किसानों को मुआवजा देने के लिए तीन करोड़ 90 लाख रुपये भेज दिया गया, लेकिन इसी बीच 122 गांवों के किसान विरोध में उतर आए हैं। किसान कृषि दर की जगह आवासीय दर से मुआवजा मांग रहे हैं। सड़क चौड़ीकरण के लिए कुल 310 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण की कार्यवाही चल रही है। मंत्रालय ने किसानों से बातचीत के लिए डीएम अनुराग पटेल को मध्यस्थ नियुक्त किया है।
122 किलोमीटर लंबे निर्माणाधीन फोरलेन का काम दिलीप बिल्डकॉन को दिया गया है। जमीन अधिग्रहण के साथ ही एसएलओ कार्यालय मुआवजा भी दे रहा है। चौड़ीकरण में जिन किसानों की जमीन जा रही है, उन्हें खतौनी समेत अन्य कागजात के आधार पर कृषि दर से सर्किल रेट के आधार पर चार गुना मुआवजा दिया जा रहा है। करीब एक करोड़ 20 लाख रुपये किसानों को मुआवजे के रूप में बांट दिया गया है। मंत्रालय से 50 करोड़ की और मांग की गई है। चुनार, लालगंज और सदर तहसील के तहत आने वाली जमीन के कुछ मालिक इस मुआवजे का विरोध कर रहे हैं। इन इलाकों में सड़क किनारे आबादी बसी हुई है। लोगों ने घर बना लिए हैं लेकिन कागजों में उनकी भूमि कृषि रूप में ही दर्ज है। ऐसे में जिला प्रशासन कृषि दर के आधार पर ही मुआवजे का निर्धारण कर रहा है। चुनार, लालगंज और सदर तहसील के 122 गांवों के किसानों के विरोध को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल उस क्षेत्र में अधिग्रहण रोक दिया गया है। फिलहाल लालगंज तहसील क्षेत्र में जहां विवाद नहीं है, वहां जमीन अधिग्रहीत कर मुआवजा देने का काम चल रहा है। हालांकि जिला प्रशासन जल्द विवाद खत्म करने का दावा कर रहा है।
कुछ गांवों के लोग आबादी की जमीन से हिसाब से मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। अगर किसी को शिकायत तो वह डीएम के आर्बिट्रेशन में जा सकते हैं।
- एमए अंसारी, एडीएम, भू राजस्व।