ज्ञानपुर। मखमली कालीनों के लिए विख्यात भदोही जिले में मासूम कुपोषण से जूझ रहे हैं। प्रशासन की लापरवाही के कारण कुपोषण के खिलाफ जंग कारगर नहीं हो पा रही। हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च के बाद भी सरकारी योजनाएं फेल होती नजर आ रही हैं। यही वजह है कि कुपोषित बच्चों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है। तीन माह पूर्व हुए सर्वे में कुल 25 हजार बच्चे कुपोषित पाए गए थे। अब यह आंकड़ा 27 हजार के ऊपर पहुंच गया है।
मातृ एवं शिशु मृत्यु दर पर नियंत्रण और कुपोषण को दूर करने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं को धरातल पर उतारने और कारगर बनाने की जिम्मेदारी बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग और स्वास्थ्य विभाग के कंधों पर है। गर्भवती महिलाओं, धात्री महिलाआें और शिशुओं की जांच, टीकाकरण व पोषण के नाम पर करोड़ों रुपये सरकार इन विभागों को भेजती है। धनराशि की बंदरबांट और प्रशासन की लापरवाही के चलते कुपोषण पर नियंत्रण की कवायद बेकार साबित हो रही है। नवंबर 2017 में शबरी संकल्प अभियान के तहत 1.37 लाख बच्चों की जांच कराई गई थी। उस समय करीब 25 हजार बच्चे कुपोषित पाए गए थे। इसके बाद फरवरी में हुए सर्वे में यह आंकड़ा 27,740 पहुंच गया। इसमें सात हजार से अधिक बच्चे अति कुपोषित चिह्नित किए गए थे रहे। इसके बावजूद न तो बच्चों की नियमित जांच हो रही और न उन्हें पोषाहार मिल पा रहा। यही वजह है कि तीन महीने में ही कुपोषित बच्चों की बढ़ती जा रही है।