वाराणसी। वर्ष 2017-18 का वित्तीय वर्ष समाप्त हो गया। इसके साथ ही हजारों उपभोक्ताआें के ‘कोटे’ का सिलिंडर भी लैप्स हो गया। ऐसे लोगों ने सिलेंडर भी बुक कराए थे पर उनको समय से डिलेवरी नहीं दी गई। ऐसे लोगों को मायूसी हाथ लगी है जिन्होंने एक सप्ताह पूर्व सिलिंडर पाने की चाहत में बुकिंग कराई होगी। हालांकि इसको लेकर गैस एजेंसियों के शोरूमों पर कर्मचारियों और ग्राहकों के बीच तीखी झड़प भी हुई। अब तो नए वित्तीय वर्ष में एक अप्रैल से नए सिरे से सब्सिडी वाला सिलिंडर मिलेगा।
वहीं ग्राहकों का आरोप रहा कि एजेंसी वालों ने फर्जी बुकिंग कर कोटे वाले सिलेंडरों को खुले बाजार में बेच दिया जबकि जिन लोगों ने बुकिंग कराई थी उनको नहीं दिया गया। खुले बाजार में बेच कर एजेंसी वालों और ट्रालीमैनों ने जबर्दस्त मुनाफा कमाया। संतोष, रामदुलार, श्यामदुलारी, प्रियंबदा, विनय कुमार आदि का आरोप था कि उज्जवला योजना के तहत मुफ्त में रसोई गैस कनेक्शन पाने वालों के पास इतने पैसे नहीं थे कि वे सिलिंडर के लिए बुकिंग करा सके।
वाराणसी एलपीजी वितरक संघ के अध्यक्ष कुमार अग्रवाल व प्रवक्ता मनीष चौबे ने ग्राहकों के आरोप को सिरे से खारिज किया। कहा कि कोटे का सिलिंडर पाने की चाहत में लोगों ने बड़ी संख्या में बुकिंग कराई थी जबकि बुकिंग के सापेक्ष प्लांट से सिलिंडर नहीं मिले। जिनकी बुकिंग पहले की थी उनको तो सिलिंडर दिया गया लेकिन बाद वालों को नहीं दिया जा सका। इसमें किसी एजेंसी संचालक की लापरवाही नहीं है।