ज्ञानपुर। केंद्र और प्रदेश की सरकारें भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए लाभार्थियों के आधार कार्ड को योजनाओं से लिंक करा रही हैं। मगर अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के चलते योजनाओं को आधार से लिंक करने का कार्य जोर नहीं पकड़ पा रहा है। इस काम में जिलापूर्ति विभाग अधिक फिसड्डी साबित हो रहा है। अब तक केवल 60 फीसदी राशन कार्डों को ही आधार से जोड़ा जा सका है। अब भी लगभग सवा लाख राशन कार्डों की फीडिंग नहीं हो सकी है।
पूर्व जिलाधिकारी विशाख जी ने एक माह पूर्व जिलापूर्ति विभाग का निरीक्षण कर आधार कार्डों की कम फीडिंग पर नाराजगी जाहिर की थी। साथ ही फीडिंग के कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया था। मगर इसका असर जिलापूर्ति विभाग पर नहीं पड़ा। विभाग उपभोक्ताओं की ओर से आधार कार्ड नंबर नहीं मुहैया कराने का बहाना बनाकर अपना पल्ला झाड़ ले रहा है। जिले में कुल 735 सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानें हैं। इनमें 15 दुकानें निरस्त हैं। वहीं 12 दुकानें निलंबित चल रहीं हैं। जिले में 305264 कार्ड धारक हैं। इनमें अंत्योदय 38264 और पात्र गृहस्थी कार्डधारक 267000 हैं। अधिकारियों की लापरवाही के चलते अब तक चार गांवों के कार्डधारकों का सत्यापन भी नहीं हो पाया है। विभागीय दावे के मुताबिक अब तक 1.83 लाख राशन कार्डों का ही सत्यापन हो सका है। जबकि यह काम छह माह पहले ही पूरा हो जाना चाहिए था। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के रवैये से उपभोक्ता परेशान हैं। नगरों के उपभोक्ताओं का आधार लिंक हो जाने से उन्हें बायोमैट्रिक मशीन से अनाज मिलने लगा है। इससे नगरीय उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत मिल गई है। मगर गांवों में सभी का आधार लिंक नहीं होने से बायोमैट्रिक मशीन से अनाज का वितरण नहीं हो पा रहा है। इससे कोटेदारों को गरीबों के हर पर डाका डालने का मौका मिल रहा है। सबकुछ जानते हुए जिलापूर्ति विभाग मौन बना हुआ हैे।