वाराणसी। विश्वविद्यालयों में विज्ञान, तकनीक, कृषि, मेडिकल के क्षेत्र में शोध करने वाले विद्यार्थियों को प्रधानमंत्री फेलोशिप देने की पहल शुरू हुई है। इसके लिए छात्र-छात्राओं का चयन कर उन्हें बेहतर शोध के लिए फेलोशिप दी जाएगी। बुधवार को बीएचयू में इसके लिए आयोजित कार्यशाला में छात्रवृत्ति से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी गई।
कृषि विज्ञान के शताब्दी कृषि सभागार में आयोजित कार्यशाला में शोध छात्रों को फेलोशिप पाने की औपचारिकताओं, मिलने वाली धनराशि, उपयोग के बारे में बताया गया। इस दौरान बीएचयू के विभिन्न संस्थानों, आईआईटी से 250 से अधिक छात्र-छात्रा मौजूद रहे। आईआईटी बीएचयू के पूर्व निदेशक प्रो.एसएन उपाध्याय, कवक एवं पादप रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो. रमेश चंद ने बताया कि समय के साथ मांग में जो परिवर्तन आता जा रहा है, उसकी पूर्ति विश्वविद्यालयों में हो रहे शोध के माध्यम से ही की जा सकती है। उपनिदेशक उच्च शिक्षा दिल्ली डॉ. नेहा गुप्ता ने छात्र-छात्राओं को शोध की रुप रेखा आदि के बारे में बताया। कार्यक्रम में कृषि संकाय की प्रमुख प्रो. बंदना बोस ने छात्रों को फेलोशिप के लिए बढ़चढ़कर भागीदारी करने के लिएप्रेरित किया। अधिकारियों ने छात्रों के सवालों का जवाब भी दिया। कार्यक्रम में प्रो. वीपी जिरली, प्रो. ओपी मिश्र, प्रो.एके सिंह, प्रो.पी राहा, डॉ. नेहा गुप्ता, रवि आदि मौजूद रहे।