वाराणसी। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण न करने और इन बैंकों के विलय को रोके जाने सहित कई मांगों को लेकर बैंक कर्मचारी मंगलवार को हड़ताल पर रहे। वाराणसी समेत समूचे पूर्वांचल में सार्वजनिक बैंकों की सभी शाखाओं पर दिन भर ताले लटके रहे। जमा-निकासी आदि के लिए गए लोगों को बैरंग लौटना पड़ा। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर हुई हड़ताल से अकेले वाराणसी जिले में करीब 300 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ।
हड़ताल के दौरान बैंक कर्मचारियों ने राष्ट्रीयकृत बैंकों के निजीकरण और विलय सहित अन्य मसलों पर आवाज उठाई। पंजाब नेशनल बैंक, इलाहाबाद बैंक, यूनियन बैंक, बैंक आफ बड़ौदा आदि बैंकों के कार्यालयों पर धरना-प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने कहा कि सरकार उनकी मांगों पर जल्द से जल्द सकारात्मक पहल करे। कहा कि धरना-प्रदर्शन के जरिए कई बार अपनी मांगों की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया गया लेकिन सरकार ने ध्यान नहीं दिया। उसके बाद उन्हें हड़ताल के लिए विवश होना पड़ा है। यूपी बैंक इंपलाइज यूनियन वाराणसी इकाई के मंत्री संजय शर्मा ने बताया कि बनारस में हड़ताल के कारण 18 हजार चेक और ड्राफ्ट का निबटारा नहीं हो पाया। नगद, अंतरण, आरटीजीएस और नेफ्ट समेत करीब तीन सौ करोड़ का कारोबार वाराणसी में प्रभावित हुआ। बताया कि सरकार ने जल्द से जल्द मांगें नहीं मानीं तो 15 सितंबर को संसद पर मोर्चे के लिए कर्मचारी दिल्ली में जुटेंगे। इस दौरान अध्यक्ष आरबी चौबे, पीके घोष, प्रमोद द्विवेदी, शीतला दूबे, अरुण सहगल, अरुण तिवारी, आरके चौधरी आदि मौजूद रहे।