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वाराणसी। काशी और नेशनल हाईवे पर ऑलीशान मकान होगा, बेहतरीन सुविधाएं, पार्किंग, खेल के मैदान जैसे लुभावने सपने दिखाकर डेवलपर्स ग्राहकों को जमीन बेच रहे हैं। हकीकत बिना जाने समझे जमीन लेने वाले वीडीए की कार्रवाई से सकते में हैं। डेवलपर्स भी फिलहाल मामले को दबाने में जुट गए हैं। हाईवे किनारे जमीन लेने वालों में ज्यादातर बिहार, भदोही और चंदोली के लोग शामिल हैं।
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हाईवे किनारे विभिन्न डेवलपर्स, ग्रुप कंपनियां अपने-अपने बोर्ड लगाकर कार्यालय खोल रखे थे। मोहन सराय से लेकर अलीनगर तक पांच सौ से अधिक लोगों ने डेढ से पांच-पांच बिस्वा तक प्लाट खरीदा है। प्रति बिस्वा 15 लाख रुपये की लागत से बेच दिया गया और डेवलपर्स ने तकरीबन 750 करोड़ रुपये वसूल लिए। अब जब अनप्रूव्ड कालोनियों एवं ले आउट पास नहीं होने पर वीडीए ने शिकंजा कसना शुरू किया तो डेवलपर्स के साथ ही मकान केलिए जमीन खरीदने वालों में भी हड़कंप मचा हुआ है। इसके अलावा सैकड़ों लोगों ने कुछ एडवांस देकर प्लाट भी बुक करा लिया है। अब उनका भी पैसा डेवलपर्स के यहां फंस गया है।
हाईवे किनारे तेजी से बढ़ रहे मल्टी स्टोरी बिल्डिगों और कालोनियां की संस्कृति का फायदा डेवलपर्स ने खूब उठाए और किसानों के साथ ही मकान बनवाने के लिए जमीन खरीदने वालों को भी खुलेआम लूट रहे हैं। वीडीए की सीमा में यह धंध लंबे अरसे से चल रहा है लेकिन अधिकारियों की बंद आंखों के कारण अब तक कुछ नहीं हो सका।
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शासन के राडार पर वीडीए के कई अफसर-कर्मचारी
वाराणसी। अवैध ढंग से कॉलोनियों को विकसित होने और उस पर लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं होने को शासन ने भी गंभीरता से लिया है।
वीडीए वीसी पुलकित खरे के खुलासे के बाद अवैध कालोनियां बसाने के लिए जिम्मेदारों पर गाज गिर सकती है। वीडीए के ऐसे कई पूर्व और वर्तमान के अधिकारी और कर्मचारी शासन के रडार पर हैं। ऐसे लोगों को चिह्नित कर कार्रवाई के लिए शासन को भेजा जाएगा।
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वीडीए वीसी गोपनीय तरीके से ऐसे कई अफसरों और कर्मचारियों के रिकार्ड को भी खंगाला जा रहा है। माना जा रहा है कि कईयों पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
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