चंदौली। भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित एआरटीओ आरएस यादव की विभागीय जांच शासन स्तर से उप परिवहन आयुक्त वाराणसी को सौंपी गई है। इस बाबत शासनादेश एआरटीओ कार्यालय भी पहुंच चुका है। लगभग एक वर्ष पूर्व उप परिवहन आयुक्त वाराणसी बनाए गए देवेंद्र त्रिपाठी की देखरेख में ही चंदौली का परिवहन विभाग संचालित हो रहा है। इतने दिनों तक निलंबित एआरटीओ आरएस यादव के काले कारनामों से अंजान रहे जांच अधिकारी किस तरह इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी करेंगे यह सवाल लोगों के जेहन में कौंध रहा है। शासन के इस निर्णय ने विभागीय जांच की पारदर्शिता को भी सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।
अवैध वसूली के आरोपों में जेल की हवा खा रहे एआरटीओ आरएस यादव पर शिकंजा कसने के लिए शासन स्तर से विभागीय जांच के निर्देश भी दे दिए गए हैं। उप परिवहन आयुक्त वाराणसी को जांच की कमान सौंपी गई है। साथ ही यह भी तय कर दिया गया है कि आरएस यादव पुलिस और विभागीय जांच पूरी होने तक लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध रहेंगे। विभागीय जांच की जिम्मेदारी उठाने वाले उप परिवहन आयुक्त विगत एक वर्ष के अधिक समय से वाराणसी में नियुक्त हैं। इनके अधीन वाराणसी, आजमगढ़, गोरखपुर और मिर्जापुर मंडल से जुड़े जनपद आते हैं। कुछ माह पूर्व जनपद में निरीक्षण के लिए आए उप परिवहन आयुक्त ने ओवर लोडिंग पर सख्ती की बात कही थी लेकिन बातों ही बातों में एआरटीओ प्रवर्तन के कार्यों को क्लीन चिट भी दे दी थी। ऐसे में शासन ने उप परिवहन आयुक्त को जांच अधिकारी बनाकर खुद उनके सामने चुनौती खड़ी कर दी है। यदि एआरटीओ के खिलाफ कार्य में लापरवाही का मामला सामने आता है तो विभागीय उच्चाधिकारी भी खुद ब खुद इसमें फंसते चले जाएंगे। इस बाबत उप परिवहन आयुक्त देवेंद्र त्रिपाठी का कहना है कि जांच किन बिंदुओं पर की जाएगी इस संबंध में उन्हें कोई लिखित निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है।