नतीजतन 15 अप्रैल को कुछ बंदियों ने गुटबंदी कर भूख हड़ताल कर दी थी। आरोप लगाया था कि घटिया दाल और चावल परोसने के साथ ही रोटी काफी कम संख्या में दी जा रही हैं। वहीं, पेशी पर जाने से भी इंकार कर दिया था। लगातार तीन दिनों तक ये प्रक्रिया चली थी। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने बंदियों को समझा-बुझाकर मनाया था।
भूख हड़ताल के बाद मामले पर जांच बैठी और वरिष्ठ जेल अधीक्षक आरके मिश्रा ने सोमवार को इसकी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंप दी। रिपोर्ट में जेल में माहौल बिगाड़ने के लिए 17 बंदियों को दोषी माना गया है। इनकी सूची जिला प्रशासन को भेज दी गई है। साथ ही इन सभी को यहां से दूसरे जनपद की जेलों में स्थानांतरित करने की मांग की है।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक आरके मिश्रा ने बताया कि अप्रैल माह में जेल में भूख हड़ताल की कोशिश और माहौल बिगाड़ने की साजिश की जांच पूरी कर ली गई है। इसके लिए 17 बंदियों को दोषी माना गया है। इनको यहां से हटाने की मांग की गई है। इसकी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंप दी गई है। जिला प्रशासन की ओर से रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक का कहना है कि पेशेवर और हार्डकोर बंदियों को सामान्य बंदियों से अलग किया जाएगा। ताकि इनका दुष्प्रभाव सामान्य बंदियों पर न पड़े। सामान्य बंदियों को अलग रख उन्हें रोजगार आदि के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
चिह्नित बंदियों में कई बड़े नाम :
सूत्रों की माने तो जेल प्रशासन की ओर से दी गई रिपोर्ट में कई बड़े नाम शामिल हैं। इनको जेल में गुटबाजी करने और बंदियों को भड़काने का आरोपी माना गया है। इनके यहां से हटने पर जेल के माहौल में सुधार होगा। वरिष्ठ जेल अधीक्षक आरके मिश्रा ने बताया कि प्रतिदिन जेल के किसी ना किसी हिस्से का औचक निरीक्षण किया जा रहा है।