जिले में टीबी रोग उन्मूलन की दिशा में चलाए गए अभियान में अब तक पचास दिन में ही 1672 नए टीबी के मरीज मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब नए मरीजों का पंजीकरण करने के बाद इनका बेहतर इलाज किया जा रहा है। इसके अलावा अब तक इस साल 751 मरीज टीबी से ठीक भी हो चुके हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2025 तक क्षय रोग के खात्मे के संकल्प को पूरा करने के उद्देश्य से ही समय-समय पर अभियान चलाकर नए मरीजों की तलाश की जा रही है। जिले के सभी पंजीकृत सरकारी अस्पतालों, निजी अस्पतालों, लैब, मेडिकल स्टोर आदि पर मरीजों की नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि इस समय करीब 4000 मरीजों का इलाज चल रहा है। यह एक संक्रामक बीमारी होने के नाते मरीज के खांसने, थूकने से अन्य लोगों में भी फैल सकती है। समय पर जांच और नियमित दवा के सेवन से उपचार पाया जा सकता है।
15 से 54 साल तक वालों में अधिक खतरा
एडिशनल सीएमओ डॉ. एके मौर्या का कहना है कि वैसे तो टीबी की बीमारी किसी उम्र में हो सकती है लेकिन 15 से 54 वर्ष तक के लोगों को टीबी होने का सबसे अधिक खतरा रहता है। 14 साल तक दो फीसदी लोगों में टीबी होने की संभावना है। वहीं 15 से 24 वर्ष तक 21 फीसदी, 25 से 34 वर्ष तक 23 फीसदी, 35 से 44 वर्ष तक 20 फीसदी, 45 से 54 वर्ष तक 16 फीसदी, 55 से 64 वर्ष तक 11 फीसदी और 65 वर्ष से अधिक के सात फीसदी लोगों में टीबी की संभावना रहती है।
एक नजर में आंकड़ा
नए मरीज
2017- 4841
2018-5786
2019-8318
2020- 7703
2021-1672
00000
टीबी से ठीक हुए मरीज
2017-856
2018-1181
2019-1599
2020-751