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खुशनुमा मौसम के लिए रोजेदारों ने किया अल्लाह का शुक्रिया

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वाराणसी। मुकद्दस रमजान का पांचवें रोजे के दिन शनिवार को मौसम भी रोजेदारों पर मेहरबान रहा। सुबह से ही आसमान में छाए बादलों के साथ कुछ जगहों पर हल्की बूंदाबांदी भी हुई। खुशनुमा मौसम के लिए रोजेदारों ने अल्लाह का शुक्रिया किया। शनिवार की शाम को मस्जिदों में जैसे ही अजान की सदाएं गूंजी, रोजेदारों ने खजूर और पानी से चौथा रोजा खोला।
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शनिवार को इफ्तार के दस्तरखान पर तमाम लजीज व्यंजनों के साथ ही गर्मी में राहत देने वाले फलों के शर्बत पर रोजेदारों का जोर रहा। परंपरागत इफ्तारी, चने की घुघनी, पकौड़ी के अलावा छोला, हलवा, मालपुआ, आम, सेब, इमरती समेत अलग-अलग घरों में तरह-तरह की इफ्तारियां सजाई गई थीं। रोजेदारों ने इफ्तारियों का लुत्फ उठाने के बाद नमाजे मगरिब अदा की। शहर के दालमंडी, नई सड़क, मदनपुरा, रेवड़ी तालाब, गौरीगंज, शिवाला, बजरडीहा, कश्मीरीगंज, कोयला बाजार, पठानी टोला, चौहट्टा लाल खां, जलालीपुरा, सरैयां, पीलीकोठी, कच्चीबाग, बड़ी बाजार, अर्दली बाजार, पक्की बाजार, रसूलपुरा, नदेसर, लल्लापुरा आदि इलाकों में रमजान की खास चहल पहल रही। मुस्लिम इलाकों में असर की नमाज के बाद और मगरिब के बाद लोग खरीदारी करने उमड़े हुए थे।
शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी सैयद फरमान हैदर ने बताया कि पवित्र कुरआन के तीसवें पारा अध्याय 30 की सूरे-काफेरून की आखिरी आयत में जिक्र है कि तुम तुम्हारे दीन पर रहो मैं मेरे दीन पर रहूं। चूंकि इस्लाम मजहब एकेश्वरवाद को मानता है और हजरत मोहम्मद को अल्लाह का रसूल स्वीकारता है। इसलिए रोजा मुसलमान पर फर्ज की शक्ल में तो है ही, अल्लाह की इबादत का एक तरीका भी है और सलीका भी।
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