वाराणसी। दुनिया का पहला कनवर्टेड लोको तैयार करने वाले डीरेका (डीरेका रेल इंजन कारखाना) को 12 हजार उच्च अश्व शक्ति के सात रेल इंजन तैयार करने का लक्ष्य रेलवे बोर्ड ने दिया है। वर्ष 2019-20 तक 14 रेल इंजनों को इस योजना के तहत बदला जाएगा।
पुराने डीजल इंजनों को परिवर्तित कर पहले से कहीं ज्यादा शक्तिशाली विद्युत रेल इंजन तैयार करने वाले डीरेका पहला 10 हजार अश्व शक्ति का एल्को श्रेणी का कनवर्टेड लोको, दूसरा 12 हजार अश्वशक्ति का एचएचपी श्रेणी का कनवर्टेड लोको तैयार कर चुका है। एल्को श्रेणी के कनवर्जन लोको के लिए पटियाला, मुगलसराय समेत अन्य दूसरे शेड से सेवानिवृत्त डीजल रेल इंजन व विद्युत इंजन के पार्ट्स मंगाए गए थे, जबकि एचएचपी श्रेणी के लिए 18 साल पुराने डीरेका में तैयार इंजनों का ही इस्तेमाल किया गया है।
ऐसे तैयार होते हैं कनवर्टेड लोको
एचएचपी श्रेणी के कनवर्टेड लोको में डीरेका के 4000 एचपी क्षमता के 18 साल पुराने डब्ल्यूडीजी-4 डीजल इंजनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। पहले दो डब्ल्यूडीजी-4 रेल इंजनों को छह-छह हजार उच्च अश्व शक्ति क्षमता के विद्युत रेल इंजनों में बदला जाता है। फिर इन्हें जोड़कर 12 हजार अश्व शक्ति क्षमता का रेल इंजन तैयार किया जाता है। आरडीएसओ के निर्देश पर पहले कनवर्टेड लोको का परीक्षण उत्तर रेलवे कर रहा है।