वाराणसी। कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में अब साफ्ट हिंदू कार्ड खेलने की तैयारी पूरी कर ली है। प्रियंका गांधी अब गंगा यात्रा के जरिए ही पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी जा रही हैं, जहां नदी किनारे बसे लोगों से वह संवाद करेंगी। सूत्रों के मुताबिक, कहा ये भी जा रहा है कि प्रियंका की इस बोट यात्रा के पीछे यह भी एक वजह हो सकती है, जिसकी बानगी उनके चुनाव प्रचार में देखने को मिल सकती है। बहरहाल प्रियंका अपने इस चुनाव प्रचार के जरिये मतदाताओं को जहां सीधे अपनी ओर आकर्षित करेेंगी वहीं दूसरी ओर लोगों को यह भी समझाने का प्रयास करेेंगी कि जिस गंगा सफाई का उनके विरोधी दम भरते हैं उसकी शुुुरुआत तो उनके पिता राजीव गांधी ने ही काशी से किया था। बनारस में वह महिला समूह के साथ ही अस्सी घाट पर मल्लाहों से भी रू-ब-रू होंगी। उनकी पीड़ा सुनेंगी। देश के शहीदों के परिजनों से भी वह मुलाकात करेंगी।
कांग्रेस अब मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में मिली सफतला के बाद उसी रणनीति को लोकसभा चुनाव में आजमाने की तैयारी में हैं। इंदिरा गांधी के तेवर वाली कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी अब अपने चुनाव प्रचार की शुरूआत सोमवार से करने वाली हैैैं, वो इलाहाबाद से बोट यात्रा के जरिए अपने इस अभियान को आरंभ करेंगी। चुनाव प्रचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में आकर खत्म होगा। अपनी इस यात्रा से पहले प्रियंका गांधी ने जनता के नाम एक खुला खत लिखा है। जिसमें उन्होंने कहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मुझे पूर्वी यूपी की जिम्मेदारी दी है, यूपी के लोगों से मेरा नाता बहुत पुराना है और आज सबके साथ मिलकर यूपी की राजनीति बदलने की जिम्मेदारी मुझे एक सिपाही के रूप में मिली है। प्रियंका ने कहा, ‘आपकी बात सुने बिना परिवर्तन नहीं हो सकता है, इसलिए मैं आपके द्वार पहुंच रही हूं। मैं जलमार्ग, बस, ट्रेन और पदयात्रा कर आपसे संपर्क करूंगी।’ अपने खत में प्रियंका गांधी ने गंगा को सच्चाई और समानता का प्रतीक बताते हुए कहा कि वह किसी से भेदभाव नहीं करतीं। प्रियंका ने कहा कि उत्तर प्रदेश का सहारा हैं, मैं गंगा जी का सहारा लेकर भी आपके बीच पहुंचूंगूी।