वाराणसी। सिक्ख धर्म के नौवें गुरु तेग बहादुर साहिब 358 साल पहलेे काशी आए थे और नीचीबाग में 7 दिन 13 माह तक यहीं तपस्या किए। उन्होंने अपने तप के बल पर ही जमीन से गंगाजल निकाल दिया था, जो आज भी लोग वहां का अमृत पाने के लिए पहुंचते हैं। गुरु तेग बहादुर के 343वें शहीदी गुरुपर्व मनाया जाएगा। जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होंगे।
गुरु तेग बहादुर साहिब पंजाब से चलकर दिल्ली, आगरा, मथुरा, कानपुर, प्रयागराज मिर्जापुर चुनार होते हुए 1660 में काशी पहुंचे। गुरु नानक देव के अनुयाई भाई कल्याण को जब यह जानकारी मिली तो उनके दर्शन के लिए अपने आवास नीचीबाग में तैयारियां की जहां गुरु तेग बहादुर ने 7 माह 16 दिन तक गुरुनानक के उपदेश श्रद्धालुओं को दिए।
गुरूद्वारा के मुख्य ग्रंथी भाई हरभजन सिंह ने बताया कि उनके आगमन के दौरान ही एक घटना घटी पूर्णिमा के दिन कल्याण भाई ने गुरुतेग बहादुर से कहा कि आज सैकड़ों श्रद्धालु काशी गंगा स्नान करने आ रहे हैं। इसलिए आपका आदेश हो तो हम भी गंगा स्नान करके आ जाएं। उन्होंने कहा कि गंगा कितनी दूर हैं तो बताया कि आधा मील इस पर उन्होंने ध्यान करते हुए घर में रखे एक पत्थर को हटाया तो वहां से एक निर्मल जलधार निकल पड़ी। इसे देख कल्याण भाई आश्चर्य चकित हो गए। जब घर आंगन में पानी भरने लगा तो गुरुजी के आदेश अनुसार पत्थर की शिला उसके स्थान पर रख दी। इस जल का स्रोत आज भी उस बाऊली साहिब के रूप में मौजूद है। इस जल का अमृत पान करने के लिए लोग दूर दूर से आते हैं। मान्यता है कि आज भी उस जल के सेवन से कई रोगों से मुक्ति मिलती है। जाते समय उन्होंने मखमली चोला कुर्ता निशानियां और चरण पादुका छोड़कर चले गए, जो आज भी उस गुरुद्वारे में रखा हुआ है। जहां दर्शन पूजन के लिए लोग उमड़ते हैं।
आज होगा आयोजन
सिक्ख धर्म के नौवें गुरु तेग बहादुर साहिब के 343 वां शहीदी गुरु पर्व मनाया जाएगा। इसका मुख्य आयोजन नीचीबाग गुरुद्वारे में होगा। इसमें गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओरसे सुबह 7 बजे नितनेम पाठ और उनका उीवान सजाया जाएगा। हजूरी रागी जत्था भाई रकम सिंह गुरुवाणी सबद कीर्तन कर संगत को निहाल करेंगे। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहेंगे।