वाराणसी। बीएचयू के विज्ञान संस्थान में हुई शिक्षकों की नियुक्ति में अनियमितता के मामले की जांच पूरी हो गई है। अब इस मामले में जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन क्या कार्रवाई करता है, उसका इंतजार है। सूत्रों की मानें तो दो सदस्यीय कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में नियुक्तियों पर सवाल खड़ा किया है। कुछ लोगों पर कार्रवाई की संस्तुति भी है, लेकिन पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन अभी कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
पूर्व कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी के कार्यकाल में विज्ञान संस्थान, पर्यावरण एवं धारणीय विकास संस्थान, आईएमएस सहित कई संकायों में 215 पदों पर नियुक्तियां हुई थीं। आरटीआई के माध्यम से मांगी गई जानकारी पर उपलब्ध कराए गए कागजातों से अनियमितता सामने आई तो कुछ लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर न्याय की गुहार लगाई। कोर्ट ने 28 मई को आदेश जारी कर कुलपति को याचिकाकर्ताओं के प्रत्यावेदन मिलने के दो माह के भीतर मामले का निस्तारण करने को कहा था। याचिका दायर करने वालों ने 16 जुलाई को प्रत्यावेदन दिया और नियमानुसार 15 सितंबर को समय सीमा पूरी हो गई लेकिन अब तक जवाब नहीं दिया गया है। सबसे अधिक अनियमितता विज्ञान संस्थान में पकड़ में आई थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सात अगस्त को हाईकोर्ट के अवकाश प्राप्त जज जस्टिस कलीमुल्लाह की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय कमेटी बनाई और 6 सितंबर तक रिपोर्ट देने को कहा था। कमेटी की चार बार हुई बैठक में नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े कागजातों की जांच के बाद अब रिपोर्ट तैयार हो गई है। उधर याचिका दायर करने वालों ने अब तक कुलपति को तीन रिमाइंडर(एक अक्तूबर, 22 अक्तूबर और एक नवंबर 2018) देकर जांच की कार्रवाई से अवगत कराने को कहा है, लेकिन अभी तक रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
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पूर्व निदेशक ने दी थी अनियमितता की रिपोर्ट
विज्ञान संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो. नवीन सिंह ने इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन को जो रिपोर्ट दी थी, उसमें उन्होंने विज्ञान संस्थान में हुई नियुक्तियों में अनियमितता की बात कही थी। इसमें अभ्यर्थियों के साथ ही उन्होंने नियुक्ति के लिए विभाग स्तर पर स्क्रीनिंग के लिए बनी कमेटी(फैकल्टी असेसमेंट कमेटी) की भूमिका पर भी सवाल खड़ा किए थे।