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पसीने से सींचकर उगा रहे सब्जियां

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ज्ञानपुर। चिलचिलाती धूप और गर्म हवाओं के थपेड़ों की वजह से जहां लोग घरों से निकलने से डरते हैं, वहीं जिले में तमाम ऐसे किसान हैं, जिनकी लगन और मेहनत की बदौलत गंगा के कछार और बंजर खेत सब्जी की फसलों से लहलहा रहे हैं। कई इलाकों में न ट्यूबवेल है और न नहर। ऐसे में अपने पसीने से खेतों को सींच कर मुनाफा कमाने वाले खेतिहर दूसरे किसानों के लिए नजीर बन गए हैं।
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भदोही जिले के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर सब्जी की खेती होती है। कोनिया क्षेत्र में गंगा का कछार जहां परवल की खेती के लिए दूर-दूर तक चर्चित है। वहीं बनारस की सीमा से लगे बाबूसराय इलाके में गर्मी में खीरा, ककड़ी, नेनुआ, कद्दू आदि की खेती की जा रही है। गंगा के कछार में पैदा होने वाली हरी सब्जियां पूर्वांचल भर की मंडियों में पहुंचाई जाती हैं। इन दिनों जहां हर तरफ धूल उड़ रही है, वहीं गंगा का तराई इलाका सब्जियों की खेती हरा-भरा हो चला है। इसी तरह ज्ञानपुर और आसपास के क्षेत्रों में भी गर्मी की सब्जियों की खेती जोरशोर से हो रही है। खास बात यह है कि गर्मी में सिंचाई के साधनों से जूझ रहे किसानों के लिए सब्जी की खेती बेहद दुरूह कार्य है। नहरों की पहुंच न होने और सिंचाई के अन्य साधनों के अभाव में किसानों को जीतोड़ मेहनत करनी पड़ रही है। तमाम किसान बाल्टियों से पानी ढोकर खेतों की सिंचाई करते हैं। बालीपुर निवासी किसान जय गोविंद मौर्या दो बीघे में सब्जी की खेती कर रहे हैं। सिंचाई के समुचित साधन न होने के कारण उन्हें बाजुओं के दम पर सब्जी उगाना पड़ता है। वह बाल्टी से पानी ढोकर लाते हैं और खेत की सिंचाई करते हैं। कहते हैं कि सीजन में हरी सब्जियां बेहतर मुनाफा दे जाती हैं।
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