वाराणसी। रजब के महीने की नौचंदी जुमेरात यानी गुरुवार को दरगाहे फातमान में जाइरीन ने मौला अली के रौजे से अलम का जुलूस उठाया। विभिन्न रौजों से नौहा मातम करता हुआ हजरत अब्बास के रौजे पर पहुंचा। यहां मर्द व ख्वातीन की भीड़ ने जियारत की। नौहा और मातम में हिस्सा लिया। इस मौके पर शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता फरमान हैदर ने कहा कि ये वो खास महीना है जिसमें मौला अली की विलादत है। ख्वाजा मोइनुद्दीन का उर्स है। कुंडे की फातिहा और मेराज का तजकरा है।
कहा कि दसवें इमाम अली नकी की शहादत का दिन है। इमाम ने अपनी पूरी जिंदगी में लोगों को कुरान की तालीम दी। लोगों को इबादत का तरीका बताया। मौके पर मौजूद सभी जाइरीन ने आंसुओं का नजराना पेश किया। वहीं सीरिया में मारे गए मजलूमों के लिए दुआख्वानी हुई। वहीं दूसरी ओर शाम में मस्जिद मीर नादे अली चाहमामा दालमंडी से अंजुमन हैदरी के जेरे इंतजाम अलम का कदीमी जुलूस उठा। जुलूस नौहा मातम करते हुए नई सड़क, काली महल होते हुए फातमान पहुंचा। यहां मौलाना नदीम असगर ने मजलिस पढ़ी। अब्बास रिजवी शफक, अंसार बनारसी, वफा बनारसी, साहब जैदी, फिरोज हुसैन, आफताब हुसैन आदि मौजूद रहे।