वाराणसी। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आह्वान पर शनिवार को चिकित्सकों ने नेशनल मेडिकल कमीशन बिल का सड़क पर उतरकर पुरजोर विरोध किया। संस्कृत विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार से वाहन रैली निकालकर चिकित्सक रविंद्रपुरी पीएम संसदीय कार्यालय पहुंचे और यहां ज्ञापन सौंपकर बिल को जनविरोधी बताते हुए पुर्नविचार करने की मांग की। इस दौरान उनकी पुलिस से हल्की नोंकझोंक भी हुई।
आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रवि वानखेडकर के नेतृत्व में निकली रैली में आईएमए बनारस शाखा के अध्यक्ष डॉ. अरविंद सिंह, सचिव डॉ. मनीषा सिंह, उपाध्यक्ष डॉ. कार्तिकेय सिंह सहित बड़ी संख्या में सदस्यों ने हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री को भेजे गए ज्ञापन के साथ ही सदस्यों ने लोगों में पर्चा बांटकर इसे मेडिकल छात्रों के साथ ही जनविरोधी बताया। उधर, आईएमए में प्रेसवार्ता के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बिल को लागू करने के पीछे सरकार की मंशा को गलत बताया। इसके लागू हो जाने से गैर सरकारी चिकित्सकों का वर्चस्व कायम होगा। सरकार ने इस बिल में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीटों को घटाकर प्राइवेट चिकित्सा शिक्षण संस्थानों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की है। इसे अगर जल्द ही वापस नहीं लिया गया तो चिकित्सक आंदोलन को बाध्य होंगे। 25 मार्च को इंदिरा गांधी स्टेडियम दिल्ली में होने वाली महापंचायत में आगे की रणनीति बनेगी। इस दौरान डॉ. ओपी तिवारी, डॉ. एनपी सिंह, डॉ. अशोक राय, डॉ. अनिल ओहरी, डॉ. केके ओझा, डॉ.अमित सिंह आदि मौजूद रहे।