औराई। क्षेत्र के नटवां में भी दबे पांव मथुरा का ‘जवाहर बाग’ तैयार हो रहा था। ग्राम समाज की जमीन पर तंबू लगाकर आश्रम चला रहे कथित संत का डेरा उखाड़ने से गांव के लोग भी खुश हैं। कथित संत ने काफी कम समय में क्षेत्र में अपना प्रभाव जमा लिया था। माधोसिंह, कठारी और केकराही समेत कई जगहों पर इस तरह के आश्रम संचालित हो रहे हैं।
नटवां से गिरफ्तार कर जेल भेजे गए कथित संत राजेंद्र प्रसाद ने तीन-चार महीनों में आसपास के गांवों में अपना जनाधार बढ़ा लिया था। वह इस कदर हावी हो रहा था कि ग्रामीण उससे भय खाने लगे थे। कई बार लोगों ने उसके खिलाफ आवाज बुलंद करने की कोशिश की लेकिन उसके साथ महिलाओं, युवतियों-युवकों की तादाद देखकर लोग चुप रह गए। ग्राम समाज की 21 विस्वा जिस जमीन पर उसने अपना डेरा जमाया था, उस पर गांव के बच्चे सुबह-शाम खेलते थे। राजेंद्र के कब्जा कर लेने के बाद बच्चों ने डर के मारे वहां जाना छोड़ दिया।
नटवा गांव में तंबू लगाकर समर्थकों के साथ वह दूर-दराज के गांवों में जाकर समतामूलक समाज और हक की बातें कर युवाओं को आकर्षित करने का प्रयास करता था। 15 वर्ष के किशोरों से लेकर 25 वर्ष तक के युवक-युवतियों का कुछ इस तरह ब्रेनवास किया जाता था कि जो एक बार आश्रम पहुंच गए, वे अपने घर लौटने का इरादा छोड़ देते थे। राजेंद्र प्रसाद एक युवक और एक युवती की जोड़ी बनाकर गांवों में भेजता था। वे लोगों को उनका हक दिलाने, धन-दौलत वालों की संपत्ति में अपना हक जताने, पंडित-पंडा, दलालों को समाप्त करने जैसी बातों से निचले तबके के युवाओं को आकर्षित किया जाता था। साथ ही आश्रम बनाने के नाम पर लोगों से चंदा भी एकत्र किया जाता था। सूत्रों के अनुसार इसी तरह के आश्रम इलाके में और भी संचालित हो रहे हैं। गौरतलब है कि मंगलवार को पुलिस ने कथित संत समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।