वाराणसी। बीएचयू में रविवार को आयोजित विदाई समारोह में कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने अपने कार्यकाल के दौरान की गई नियुक्तियों को जरूरी ठहराते हुए उन्होंने यह स्वीकार करने में गुरेज नहीं किया कि योग्य अभ्यर्थियों के अभाव में मजबूरी में उन्हें कुछ अयोग्य लोगों की भी नियुक्तियां करनी पड़ीं। यह भी स्वीकार किया कि 80 फीसदी रिक्तियों की तुलना में 85 फीसदी की नियुक्ति कर लीं।
कार्यकाल के अंतिम दिन केएन उडप्पा सभागार में आयोजित विदाई समारोह में प्रो. जीसी त्रिपाठी ने कहा कि नियुक्तियों के समय मुझसे भी गलतियां हुईं लेकिन मैने संस्थान की मर्यादा पर कोई आंच नहीं आने दी। पूर्वोत्तर से लेकर बंगाल, आंध्र, ओडिशा, केरल, कनार्टक, तमिलनाडु, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, हिमाचल... इन सभी प्रदेशों के लोगों की नियुक्तियां की गईं। कभी-कभी कुछ अयोग्य लोग भी चुन लिए जाते हैं, ये मजबूरी है। अगर मैं गलत हूं तो प्रायश्चित भी करने को तैयार हूं।
प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि यह मेरी कमजोरी है कि मैंने प्राध्यापकों के हितों के संरक्षण के लिए थोड़ी बेईमानी की। अब जो आ गया वह जा नहीं सकता। अगर हताश करूंगा तो निराशा ही होगी। मैंने किसी को लाया नहीं। कुलपति ने कहा कि इन सबके बावजूद परिसर में कई चुनौतियां हैं, जिसे पूरा करना होगा। कुलपति की नियुक्ति पर भी उन्होंने कहा कि इसके लिए प्रोफेसरशिप ही मेरिट होती है। कुलपति योग्यता की वजह से नहीं बनता। अगर किसी की हुई तो वह उसका भ्रम है।
कुलपति ने विश्वविद्यालय के विकास के लिए सदैव प्रयत्नशील रहने का शिक्षकों से आह्वान करने के साथ ही कैंसर संस्थान, भारत अध्ययन केंद्र, नर्सों की कमी पूरी करने समेत अपने कार्यकाल की अन्य उपलब्धियां भी गिनाईं। समारोह में विज्ञान संस्थान की निदेशक प्रो. चंदना हालदार, बीएचयू कार्यकारिणी परिषद सदस्य प्रो. चितरंजन ज्योतिषी, कृषि विज्ञान संस्थान निदेशक प्रो. ए. वैशंपायन, प्रबंध अध्ययन संस्थान निदेशक प्रो. राजकुमार, प्रो. कविता शाह, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओपी उपाध्याय, चीफ प्राक्टर प्रो. रोयाना सिंह सहित कई लोग मौजूद रहे।
उधर, करीब डेढ़ माह से भी ज्यादा समय बाद परिसर में कुलपति के पहुंचने की सूचना पर छात्रों ने हंगामा मचाया। इस दौरान उनके कैंपस से वापस जाने जैसे नारे भी खूब लगे और छात्रों और सुरक्षाकर्मियों में जमकर नोंकझोंक भी हुई। बाहर हंगामा चलता रहा और भीतर कुलपति का विदाई समारोह।